खंडवा, 14 फरवरी 2026: एक बार फिर आरक्षण के नाम पर अनारक्षित वर्ग के साथ भेदभाव और उनको शिक्षा एवं सुविधाओं से वंचित करने का मामला सामने आ गया है। माखनलाल यूनिवर्सिटी की छात्रा ने बड़ी ही मासूमियत से सिर्फ एक सवाल पूछा है, क्या यह कॉलेज सिर्फ एससी एसटी वालों का है। यदि नहीं है तो फिर पढ़ने के लिए जो सुविधा उनको मिल रही है वह हमको भी मिलना चाहिए।
सरकार उसको पढ़ने नहीं दे रही क्योंकि वह आरक्षित नहीं है
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) February 14, 2026माखनलाल यूनिवर्सिटी की छात्रा का मासूम सवाल अब समाज में गूंज रहा है। वह कुछ ज्यादा नहीं मांग रही है, बस पढ़ना चाहती है लेकिन सरकार की सभी योजनाएं अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों के लिए हैं। निर्धन अनारक्षित वर्ग और पिछड़ा वर्ग के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है। इस प्रकार की योजनाएं एक तरफ अनुसूचित जाति जनजाति के विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए अच्छी सुविधा उपलब्ध करा रही है तो दूसरी तरफ सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के मन में हीन भावना भर रही है। मध्य प्रदेश में सरकार, ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय और ठाकुर (यहां ठाकुर से तात्पर्य सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पिछड़ा वर्ग) इत्यादि जाति के विद्यार्थियों को पढ़ने नहीं दे रही है। उनके साथ भेदभाव कर रही है।
मामला क्या है
आदिम जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह एक सरकारी कॉलेज (माखनलाल चतुर्वेदी शासकीय महाविद्यालय) के छात्रोत्सव कार्यक्रम में गए थे। वहां उन्होंने मुख्य रूप से एससी/एसटी (विशेषकर आदिवासी) छात्र-छात्राओं के लिए कुछ योजनाओं की घोषणा की, जैसे उच्च शिक्षा के लिए कोचिंग सेंटर, स्टेशनरी सामग्री का वितरण आदि। इसी कार्यक्रम के दौरान सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) की कुछ छात्राओं ने मंत्री को घेर लिया और सवाल पूछा कि:
- क्या यह कॉलेज सिर्फ एससी/एसटी वालों का है?
- सिर्फ एससी/एसटी छात्राओं को ही स्टेशनरी क्यों बांटी जा रही है, सामान्य और ओबीसी वर्ग की छात्राओं को क्यों नहीं?
- क्या सारी योजनाएं और लाभ सिर्फ एससी/एसटी के लिए हैं? हम गरीब छात्राओं का क्या?
छात्राओं ने कहा कि पढ़ाई में जातीय भेदभाव क्यों हो रहा है, और सभी वर्गों के गरीब छात्रों को समान अवसर मिलने चाहिए।

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