UJJAIN सांसद की बहन जबरदस्ती गर्भग्रह में घुस गईं, कपड़े भी ढंग के नहीं थे

Updesh Awasthee
उज्जैन, 16 फरवरी 2026:
महाशिवरात्रि के अवसर पर एक बार फिर महाकाल के गर्भग्रह में नेताओं की दबंगई देखने को मिली। श्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो नियम तोड़ने का संकल्प ले रखा है। इस बार भी तोड़ दिया। नया नाम सांसद महोदय की बहन का है। जबरदस्ती गर्भगृह में घुस गईं। कपड़े भी ढंग के नहीं थे। जब सवाल किया तो कहने लगी की भावनाओं में बह गई थी। 

मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का है

मंदिर समिति ने महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश 4 जुलाई 2023 से बंद किया था। सावन माह में अत्यधिक भीड़ के कारण इसे अस्थाई रूप से बंद किया था, लेकिन इसे सामान्य दर्शन के लिए नहीं खोला गया है। इस बीच पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में भी इस संबंध में याचिका लगाई गई, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। हाल ही में हाईकोर्ट ने कहा है कि इस संबंध में कलेक्टर ही अनुमति दे सकते हैं।

घटना का विवरण 

महाशिवरात्रि के दिन रविवार की दोपहर में तहसील की पूजन के दौरान सांसद की बहन योगेश्वरी फिरोजिया (उपनिदेशक कालिदास संस्कृत अकादमी) और महापौर मुकेश टटवाल महाकाल के गर्भगृह में बिना अनुमति पहुंच गए। दौरान बहन जी के परिधान भी गर्भग्रह की मर्यादा के अनुरूप नहीं थे। 

महापौर के पास स्पेशल प्रिविलेज

महापौर मुकेश टटवाल से जब अनुशासनहीनता का कारण पूछा तो बोले कि मैं समिति का सदस्य हूं। किसी भी समय गर्भग्रह में दर्शन कर सकता हूं। यहां नियम और विधान देखना होगा कि क्या समिति के सदस्यों को किसी भी समय दर्शन की अनुमति है या फिर वह केवल व्यवस्था की दृष्टि से प्रवेश कर सकते हैं?

बहन जी का जवाब पढ़िए, आनंद आ जाएगा

जब बाद में पत्रकारों ने सवाल किया तो जवाब में कहा: मेरे सामने मेरे पिता महादेव थे, साथ में वरिष्ठ नागरिक मेरी माता। उस समय भावनाओं में बहकर मैं गर्भगृह में चली गई थी। जिसका मुझे खेद है। रही बात परिधान की तो उस समय मुझे केवल बाबा ही दिखाई दे रहे थे, जिससे परिधान का ध्यान नहीं रखा। 

सवाल यह है कि क्या जनता की भावनाओं का भी मंदिर में ऐसा ही सम्मान किया जाएगा। 

इस तरह की अनुशासनहीनता के लिए नेता और उनके परिवार वाले नहीं बल्कि मंदिर प्रशासन जिम्मेदार है। एक तरफ नेताओं और उनके घर वालों को अवैध एंट्री दी जाती है। बदले में कुछ लोग रिश्वत लेकर अवैध एंट्री करवाते हैं। यदि ऐसा ही हाल रहा तो मध्य प्रदेश के सबसे लोकप्रिय धार्मिक पर्यटक स्थल की स्थिति भी बिल्कुल उत्तर प्रदेश के मंदिरों जैसी हो जाएगी। यदि बदनामी से बचाना है और व्यवस्था बनानी है तो महाकाल मंदिर मैनेजमेंट को दक्षिण भारत से सीखना होगा। और किसी नेता से इतना भी क्या डरना की घटनाक्रम का सीसीटीवी वीडियो तक मीडिया को नहीं दे रहे।
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