खजुराहो, 21 फरवरी 2026: कहते हैं कि एक नेता को थोड़ा बेशर्म होना चाहिए परंतु इतना भी नहीं होना चाहिए कि, उसके साथ उसकी पार्टी और देश-प्रदेश का मजाक बन जाए। खजुराहो फेस्टिवल में संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी की बेशर्मी, आज की सबसे बड़ी हैडलाइन है जबकि क्या होना चाहिए था, बताने की जरूरत नहीं।
Khajuraho Dance Festival में नेताओं का क्या काम
The world famous Khajuraho Dance Festival का इंतजार दुनिया भर में लोग साल भर करते हैं। यूट्यूब चैनल पर लाइव नहीं देखते, इस फेस्टिवल को एक्सपीरियंस करने के लिए खजुराहो आते हैं, हजारों लाखों रुपए खर्च करते हैं। लेकिन यह बात शायद मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रियों को समझ में नहीं आती। शुक्रवार 20 फरवरी को खजुराहो फेस्टिवल का शुभारंभ था। इस तरह की इवेंट्स में नेताओं की कोई भूमिका नहीं होती, कोई भी उनकी उपस्थिति नहीं चाहता, लेकिन सरकारी इवेंट है तो सरकार में बैठे नेता इस बात का फायदा भी उठाते हैं।
शर्मा जी समझदार थे, 3 मिनट में निकल लिए
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए करीब 16 मिनट तक अपना संबोधन दिया। यहां दर्शकों का 15 मिनट का कोटा पूरा हो चुका था। पब्लिक इससे ज्यादा नेताओं को झेलने के मूड में नहीं थी लेकिन तभी सांसद विष्णु दत्त शर्मा मंच पर आ गए। पब्लिक का रिएक्शन तो शर्मा जी को भी मिल जाता लेकिन शर्मा जी विद्यार्थी परिषद से आए हैं, उनको पता है ऐसे मौके पर ज्यादा देर तक मंच पर टिके नहीं रहना चाहिए। इसलिए 3 मिनट में निकल गए।
इसे कहते हैं टॉप की बेशर्मी
इसके बाद संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी मंच पकड़ लिया, तो दर्शक बुरी तरह भड़क गए। देखते ही देखते सामने बैठी भीड़ 'गो बैक' के नारे लगाने लगी और चारों तरफ से 'हो-हो' का शोर सुनाई देने लगा। टॉप की बेशर्मी वाली बात यह रही कि इतनी भारी हूटिंग के बावजूद मंत्री जी अपना भाषण देते रहे। वे करीब 6 मिनट तक बोले और अंत में जब शोर और बढ़ा, तो वे चार पंक्तियां सुनाने की जिद पर अड़ गए। दर्शकों की पीड़ा समझते हुए उन्होंने मंच से यह तो स्वीकार किया कि लोग कार्यक्रम देखने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन फिर भी बिना अपनी कविता सुनाए और जयकारे लगवाए बगैर वे मंच से नीचे नहीं उतरे।

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