SATNA नगर निगम में पावर गेम, 29 पार्षदों ने की कमिश्नर को हटाने की मांग

Updesh Awasthee
सतना, 19 फरवरी 2026
: इस वक्त की बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है, जहाँ नगर निगम में महापौर योगेश ताम्रकार और निगमायुक्त शेर सिंह मीना के बीच चल रहा प्रशासनिक शीतयुद्ध अब खुले संग्राम में बदल गया है। बुधवार की देर शाम सर्किट हाउस में हुए एक बड़े घटनाक्रम में, महापौर ने पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल और नगर निगम अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी 'पालन' के साथ मिलकर कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। 

मुख्य मांग और सियासी आंकड़े: 

इस ज्ञापन के जरिए सीधे तौर पर निगमायुक्त शेर सिंह मीना को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की गई है। इस मुहिम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निगमायुक्त के खिलाफ इस मोर्चे पर 29 पार्षदों ने हस्ताक्षर कर महापौर का समर्थन किया है। हालांकि, इस विरोध प्रदर्शन से एमआईसी सदस्य आदित्य यादव की दूरी शहर के गलियारों में कई राजनीतिक सवाल भी खड़े कर रही है।

विवाद की जड़: फाइलों का 'डेडलॉक' और प्रशासनिक उपेक्षा 

महापौर योगेश ताम्रकार ने निगमायुक्त पर कार्यप्रणाली को बाधित करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कलेक्टर के सामने अपनी बात रखते हुए महापौर ने स्पष्ट किया कि:
• पिछले 6 महीनों से निगमायुक्त पार्षदों की किसी भी फाइल को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।
• यहाँ तक कि महापौर द्वारा व्यक्तिगत रूप से मार्क की गई फाइलें भी हस्ताक्षर के लिए लंबित पड़ी हैं।
• शहर के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलों की वित्तीय स्वीकृति हो चुकी है, लेकिन कमिश्नर के हस्ताक्षर न होने के कारण टेंडर प्रक्रिया रुकी हुई है।

महापौर ने शहर की बदहाली का हवाला देते हुए कहा कि 50 किलोमीटर डामर रोड के लिए फाइल लंबित रखी गई है, जबकि शहर की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। महापौर का दर्द झलका कि अधिकारियों की फाइलों को दबाकर बैठने की आदत की वजह से जनता जनप्रतिनिधियों को गालियां दे रही है और पूरा शहर परेशान है।

पृष्ठभूमि: 
ज्ञात हो कि इस विवाद की पहली चिंगारी 17 दिसंबर को हुई एमआईसी (MIC) बैठक में दिखी थी। उस समय महापौर एमआईसी के निर्णयों का पालन नहीं होने से इतने नाराज हुए थे कि वे बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए थे। अब यह विवाद पूरी तरह सतह पर आ चुका है और शहर की राजनीति में उबाल पैदा कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद शासन स्तर पर क्या कार्रवाई होती है और सतना नगर निगम का यह 'डेडलॉक' कब टूटता है।
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