भोपाल समाचार, 21 फरवरी 2026: एक तरफ मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक वर्ग एक और वर्ग 2 की लगभग 1 लाख वैकेंसी है और दूसरी तरफ शिक्षक चयन परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवार वेटिंग लिस्ट क्लियर करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, सरकार वैकेंसी भी ओपन नहीं कर रही है। बजट में कहा कि इस बार 15000 शिक्षकों की भर्ती करेंगे। जिसमें प्राथमिक शिक्षक भी शामिल हैं।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एक लाख शिक्षकों की कमी है, यह कोई पॉलिटिकल स्टेटमेंट नहीं है बल्कि CAG REPORT का आंकड़ा है। सरकार के कामकाज की ऑडिट रिपोर्ट है। CAG REPORT बताती है कि राज्य अनिवार्य छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) बनाए रखने में विफल रहा। यानी जितने छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए, उससे कहीं ज्यादा छात्र एक ही शिक्षक के भरोसे हैं।
मिडिल स्कूलों में तय मानक 35 छात्रों पर एक शिक्षक का है। यहां 37 छात्र एक शिक्षक पर निर्भर हैं।
सेकंडरी स्कूलों में स्थिति और खराब है, जहां 30:1 का अनुपात होना चाहिए। वहां 40 छात्र एक शिक्षक पर हैं।
सबसे चिंताजनक हाल हायर सेकंडरी स्कूलों का है। यहां 30 छात्रों पर एक शिक्षक की जगह 54 छात्रों को एक शिक्षक संभाल रहा है।
यही वजह है कि हायर सेकंडरी में 45% और सेकंडरी में 40% शिक्षकों के पद खाली पाए गए।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शिक्षकों की पोस्टिंग, नामांकन के अनुरूप संतुलित नहीं है। ग्रामीण स्कूलों में रिक्तियां ज्यादा हैं। कुछ शहरी स्कूलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इससे शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित हुए। कैग ने संकेत दिया है कि यदि समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए तो पढ़ाई की गुणवत्ता और परिणाम दोनों प्रभावित होंगे।

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