SAGAR के स्टिंग ऑपरेशन पर हाई कोर्ट ने गृह विभाग और DGP से जवाब मांगा

Updesh Awasthee
जबलपुर, 5 फरवरी 2026
: मध्य प्रदेश के सागर जिले से कानून-व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ कानून की रक्षा करने वाली एजेंसियों पर ही कानून का मखौल उड़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में छपी सनसनीखेज रिपोर्ट के बाद, अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। 

थानों के भीतर से चल रहा था ड्रग्स का खेल 

मामले की शुरुआत 30 नवंबर 2025 को प्रकाशित एक खबर से हुई, जिसकी हेडिंग थी "सागर में डिमांड पर थाने से मिल रही ड्रग्स, टी आई ने दिलाई शराब"। पत्रकार श्री राहुल शर्मा की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया था कि मोतीनगर थाने के अंदर से एक नाबालिग ड्रग्स की 15 पुड़िया लेकर बाहर आया। इसके अलावा, निगम ऑफिस के पास स्थित स्पा सेंटरों में पुलिस के संरक्षण में देह व्यापार संचालित होने और थाना प्रभारियों द्वारा अवैध शराब की पेटियां बेचे जाने के भी संगीन आरोप लगाए गए हैं। 

हाईकोर्ट में जनहित याचिका और स्टिंग ऑपरेशन के सबूत 

इन कृत्यों के विरोध में 'एडवोकेट यूनियन फ़ार डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस' नामक संस्था द्वारा एक जनहित याचिका (WP/47116/2025) दायर की गई। 5 फरवरी 2026 को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की खंडपीठ के समक्ष स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो एवं ऑडियो रिकॉर्ड पेश किए गए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर और पुष्पेंद्र कुमार शाह ने पैरवी की। 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सख्त निर्देश 

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस के इन कथित कृत्यों को बेहद गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए हैं:
• एडिशनल चीफ सेकेट्री (गृह मंत्रालय) और डी.जी.पी. (भोपाल) को निर्देशित किया गया है कि वे 20 फरवरी 2026 तक हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर यह बताएं कि इन दागी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्यवाही की गई है।
• जिस समाचार पत्र में यह खबर प्रकाशित हुई थी, उसके मुख्य संपादक (Chief Editor) को भी खबर से संबंधित सभी मूल दस्तावेज और रिकॉर्ड न्यायालय में दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

अगली सुनवाई पर टिकी नजरें 

लोकतांत्रिक कल्याणकारी राज्य में पुलिस द्वारा किए जा रहे इस तरह के गैर-कानूनी कृत्यों पर कोर्ट की इस सख्ती ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह होगा कि गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय अपने शपथ पत्र में क्या सफाई पेश करते हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को नियत की गई है।
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