Railway employee commits suicide in Guna, 2 अधिकारियों से विवाद हो गया था

Updesh Awasthee
गुना, 20 फरवरी 2026
: लोग आत्महत्या तब करते थे जब जीवन के लिए कोई मार्ग शेष न रह जाए लेकिन आजकल हालत काफी बदल गए हैं। लोग थोड़े से तनाव में सुसाइड कर लेते हैं। रेलवे के एक कर्मचारी ने इसलिए सुसाइड कर लिया क्योंकि दो अधिकारियों के साथ उसका विवाद हो गया था और और दोनों अधिकारियों ने उसके वेतन काटने की धमकी दे दी थी। कर्मचारी की उम्र 50 वर्ष थी यानी नौकरी में लंबा समय बिता चुका था और इस प्रकार के कई संघर्ष उसने अपनी लाइफ में देख भी होंगे। 

1 फरवरी को दो अधिकारियों से विवाद हो गया था

लोकल मीडिया न्यूज़ और पुलिस सूत्रों से पता चला है कि, गुना के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) कार्यालय में हेल्पर के पद पर तैनात 50 वर्षीय किशोरीलाल कुशवाह ने बीती शाम अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगा ली।  किशोरीलाल ने मौत को गले लगाने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया और एक सुसाइड नोट भी छोड़ा। इनमें उन्होंने अपने ही कार्यालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट के अनुसार, किशोरीलाल 1 फरवरी को ड्यूटी पर तैनात थे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें जानबूझकर 'अनुपस्थित' (Absent) मार्क कर दिया। जब उन्होंने इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराई, तो उनकी हाजिरी दुरुस्त करने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 

वेतन कटने और कार्रवाई के डर से सुसाइड कर लिया

मृतक के बेटे अजय कुशवाह ने बताया कि उनके पिता पिछले 10 दिनों से काफी तनाव में थे। वह नियमित रूप से काम पर जा रहे थे, लेकिन अधिकारी उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे थे। उन्हें बार-बार नौकरी से निकालने या वेतन काटने की धमकी दी जा रही थी। परिवार का कहना है कि इसी डर और अपमान के कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

पुलिस इंस्पेक्टर का स्टेटमेंट

गुना शहर कोतवाली प्रभारी कुशल पाल सिंह के अनुसार, पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन, वीडियो और सुसाइड नोट जब्त कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि सुसाइड नोट और वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। साथ ही विभाग के अन्य कर्मचारियों और आरोपित अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने विश्वास दिलाया है कि साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। 

असली प्रॉब्लम पर रिसर्च कब होगी

यह मामला स्पष्ट बताता है कि, आत्महत्या का कारण ऑफिस का तनाव नहीं है बल्कि समाज की बदलती मानसिक स्थिति है। एक 50 वर्षीय अनुभवी कर्मचारियों ने ऐसे कई तनाव देखे होंगे। वेतन कटने के दर से कोई आत्महत्या कर ले, यह बात समझ में नहीं आती। नौकरी चल जाने से यदि कोई आत्महत्या करता होता तो, भारत में बेरोजगारों की संख्या खत्म हो गई होती, क्योंकि जितने भी बेरोजगार घूम रहे हैं, उनकी कम से कम 2-4 बाहर नौकरी जा चुकी होगी। हाल ही में AI ने लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया है। 

बात मानसिक स्थिति की है। किशोरी लाल किसी और तनाव में चल रहे थे। 1 फरवरी को जो कुछ भी हुआ उसने ट्रिगर का काम किया है। अधिकारियों से विवाद, आत्महत्या का अंतिम कारण है परंतु एकमात्र कारण नहीं हो सकता। यदि समाज में लोगों की बदलती हुई मानसिक स्थिति का अध्ययन किया जाए तो, दूसरे लोगों को आत्महत्या की तरफ बढ़ने से बचाया जा सकता है लेकिन दुख की बात यह है कि मध्य प्रदेश और भारत में इस तरह की जांच का कोई प्रावधान ही नहीं है। 
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