भोपाल समाचार, 20 फरवरी 2026: यदि आप मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपने रहने के लिए घर बनाना चाहते हैं तो कोलार, नीलबढ़, रातीबढ़ और होशंगाबाद रोड क्षेत्रों में प्रॉपर्टी लेने से पहले यह बात जरूर जान लीजिए, जो आपको कोई नहीं बताएगा। इन इलाकों में ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी में वही खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया है जो इंदौर के भागीरथपुरा में पाया गया था। जिसके कारण 35 लोगों की मौत हो चुकी है।
कोलार, नीलबढ़, रातीबढ़ और होशंगाबाद रोड क्षेत्रों में जिंदगी मुश्किल है
भोपाल शहर के कोलार, नीलबढ़, रातीबढ़ और होशंगाबाद रोड क्षेत्रों में जिंदगी थोड़ी ज्यादा मुश्किल है। यहां भूगर्भ के पानी में (यानी ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी में) खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। जरा सोचिए की स्थिति कितनी खतरनाक होगी क्योंकि जो नगर निगम गंदे नाले के पानी को पीने योग्य बता रहा था, उसी नगर निगम की टीम ने इन इलाकों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि की है। बाढ़ क्रमांक 80 से 85 तक की स्थिति काफी गंभीर है। यह स्थिति लंबे समय तक गंभीर रहेगी क्योंकि इन क्षेत्रों में जमीन के ऊपर घर तो बहुत अच्छे बने हैं परंतु जमीन के नीचे सीवेज नेटवर्क नहीं है। हजारों सेप्टिक टैंक बने हुए हैं, जिनके पानी में खतरनाक ईकोलाई बैक्टीरिया पाया जाता है। यह लगातार जमीन के अंदर जा रहा है और लोग ट्यूबवेल से पानी निकाल कर पी रहे हैं।
गेहूंखेड़ा की कृष्ण ग्रीन कॉलोनी में सीवेज नेटवर्क नहीं होने से नालियों का गंदा पानी एक ही जगह पर इकट्ठा होता है। धीरे-धीरे यह पानी जमीन में रिसता है और भूजल को दूषित करता है। मजे की बात देखी कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद बिल्डर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीवेज नेटवर्क को प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है।
अभी तक प्रॉब्लम सॉल्व करने की प्लानिंग भी नहीं है
बड़ी चिंता की बात यह है कि अभी तक प्रॉब्लम को सॉल्व करने की कोई प्लानिंग ही नहीं है। नगर निगम यहां बल्क कनेक्शन देता है जो काफी महंगा पड़ता है। यदि कोई एक व्यक्ति नगर निगम से कनेक्शन प्राप्त करना चाहे तो उसे नहीं मिल सकता। प्रॉब्लम सिर्फ इतनी सी नहीं है। नीलबढ़ में रहने वाले सुरेंद्र यादव ने बताया कि घर पर पहले ट्यूबवेल ही था। फिर नगर निगम की लाइन आने के बाद निजी कनेक्शन ले लिया। नगर निगम मुश्किल से 10 मिनट पानी देता है। हर दूसरे दिन गंदा और बदबूदार पानी आता है। ट्यूबवेल का पानी पीना मजबूरी है।
हिनोतिया आलम निवासी राजाराम मालवीय ने बताया कि ट्यूबवेल के अलावा पानी का कोई दूसरा स्रोत नहीं है। निगम से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक फरियाद की है। पर राहत नहीं मिली। ऐसे में यही विकल्प है।
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन का कहना है कि जहां से भी शिकायत मिलती है, जांच कराई जाती है। ट्यूबवेल उपयोग करने वालों को पानी की जांच करानी चाहिए। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे नगर निगम की सप्लाई का पानी ही पीने में उपयोग करें।

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