भोपाल समाचार, 4 फरवरी 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश पोस्ट ऑफिस घोटाले के मास्टरमाइंड के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। यह अपने आप में एक अनोखा घोटाला है। इसमें सब पोस्टमास्टर, पोस्ट ऑफिस के सॉफ्टवेयर में घुसकर सवा करोड रुपए चुरा लिया और किसी को पता तक नहीं चला। डिपार्टमेंट को पता था कि चोरी हो गई है लेकिन इसका कोई सबूत नहीं था। फिर सीबीआई ने छापा मारा...
अशोक कुमार सोनी के नाम प्री-कॉग्निजेंस हियरिंग नोटिस जारी
प्राप्त हुई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ED के भोपाल जोनल ऑफिस ने 4 फरवरी 2026 को अशोक कुमार सोनी के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत माननीय विशेष न्यायालय (PMLA), भोपाल के समक्ष एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (PC) यानी चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए, अदालत ने आरोपी के खिलाफ प्री-कॉग्निजेंस हियरिंग (संज्ञान लेने से पूर्व की सुनवाई) के लिए नोटिस भी जारी कर दिया है।
पोस्ट ऑफिस के सॉफ्टवेयर में घुसकर सवा करोड रुपए चुरा लाया
ED की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जब अशोक कुमार सोनी राजगढ़ जिले के जीरापुर उप डाकघर में सब पोस्ट मास्टर के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2016 से मई 2017 के बीच सोनी ने 'संचय पोस्ट' (Sanchay Post) सॉफ्टवेयर का उपयोग करके 138 डाक बचत बैंक खातों में फर्जी और बैकडेटेड जमा प्रविष्टियां कीं।
इस धोखाधड़ी के जरिए, उन्होंने बिना किसी वास्तविक नकद जमा के इन खातों के बैलेंस को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया। जैसे ही इन खातों को संचय पोस्ट से 'फिनाकल' (Finacle) सिस्टम में माइग्रेट किया गया, सोनी ने धोखाधड़ी से कुल 1,23,31,180 रुपये की राशि निकाल ली। जांच एजेंसी ने इस राशि को 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) करार दिया है।
CBI घर में घुसकर घोटाले के सबूत उठा लाई
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब CBI, ACB, भोपाल ने अशोक कुमार सोनी के खिलाफ IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act), 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। इसके बाद, 15 दिसंबर 2020 को विशेष न्यायाधीश, CBI मामलों की अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की गई थी, जिसके आधार पर ED ने अपनी जांच शुरू की।
सवा करोड रुपए वापस करने पड़े और कानूनी डंडा चल रहा है, सो अलग
विशेष बात यह है कि धोखाधड़ी की इस घटना के बाद, अशोक कुमार सोनी ने नवंबर और दिसंबर 2017 के दौरान 1,24,44,800 रुपये की राशि नकद में वापस जमा कर दी थी। हालांकि, नियम विरुद्ध तरीके से धन अर्जित करने और सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करने के कारण अब उन्हें PMLA के तहत कठोर कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल, सभी की निगाहें भोपाल की विशेष अदालत पर टिकी हैं, जहाँ जल्द ही इस मामले की सुनवाई शुरू होगी।
निष्कर्ष:
- यह मामला प्रमाणित करता है कि ऑनलाइन सिस्टम और सॉफ्टवेयर का मतलब, सिक्योरिटी की गारंटी नहीं होता बल्कि सॉफ्टवेयर ऑपरेट करने वाला भी सॉफ्टवेयर की गलती का फायदा उठा सकता है।
- यह मामला, यह भी प्रमाणित करता है कि आप कितने भी चतुर क्यों ना हो, आपके खिलाफ कोई भी सबूत ना हो लेकिन जिंदगी, फिल्मों की तरह आसान नहीं होती। यदि सबूत नहीं होता तो CBI जैसी एजेंसी आती है और फिर चोरी करने वाला जिसने सबूत नहीं छोड़े थे, वह सबूत क्रिएट करके देता है।

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