इंदौर, 4 फरवरी 2026: इंदौर में नगर निगम एक कर्मचारी ने अपने घर में नोटों का पेड़ लगा लिया था। हर महीने जितनी सैलरी मिलती थी उसका डबल नगर निगम के नोटों के पेड़ से तोड़ लेता था। पकड़े जाने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ने भी ऐसा ही किया है। उसकी 80 करोड रुपए मूल्य की प्रॉपर्टी को, 40 करोड रुपए के बदले कुर्क कर लिया है। यह इंदौर का चेतन पाटील कांड है, नाम तो सुना होगा...
जांच में सैलरी से दोगुनी काली कमाई मिली
ईडी की ओर से प्राप्त आधिकारिक सूचना में बताया है कि उन्होंने यह जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW), इंदौर द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि चेतन पाटिल ने 1 अक्टूबर 1998 से 12 अप्रैल 2023 के बीच अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की थी। जहां उनकी कुल कानूनी आय लगभग 55.11 लाख रुपये होनी चाहिए थी, वहीं उनके पास करीब 1.38 करोड़ रुपये की संपत्ति पाई गई।
जिस कंपनी के पास कोई काम नहीं है उसमें करोड़ों का ट्रांजैक्शन
ईडी की जांच में धन शोधन (Money Laundering) के हैरान करने वाले तरीके सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अपराध की इस कमाई को चेतन पाटिल और उनकी पत्नी के नाम पर संचालित 'मेसर्स नग्रोध आर्किटेक्ट इंजीनियर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर' नामक एक प्रोपराइटरशिप फर्म के माध्यम से वैध बनाने की कोशिश की गई थी।
जांच में पाया गया कि इस फर्म का कोई वास्तविक व्यावसायिक कार्य नहीं था और इसका उपयोग केवल बेहिसाब नकद जमा करने और फंड की हेराफेरी (layering) के लिए किया जा रहा था। इन 'दागी' पैसों का इस्तेमाल बाद में अचल संपत्तियां खरीदने, होम लोन चुकाने, एलआईसी (LIC) प्रीमियम भरने और अन्य व्यक्तिगत खर्चों के लिए किया गया।
ED की कार्रवाई
भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने इंदौर नगर निगम (IMC) के पूर्व कर्मचारी चेतन पाटिल और उनकी पत्नी ज्योति पाटिल की 39.91 लाख रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (attach) कर लिया है। यह कार्रवाई 2 फरवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।
40 लाख की प्रॉपर्टी 80 लाख की हो गई
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में प्लॉट और आवासीय भवन शामिल हैं। हालांकि दस्तावेजों में इनका मूल्य 39.91 लाख रुपये दर्शाया गया है, लेकिन ईडी के अनुसार इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य 80 लाख रुपये से अधिक है। फिलहाल, इस मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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