शिवपुरी, 11 फरवरी 2026: ओबीसी आरक्षण की वकालत करने वाले ओबीसी को ऐतिहासिक रूप से पीड़ित बताते हैं जबकि वर्तमान में स्थिति कुछ और है। मध्य प्रदेश की शिवपुरी जिले में OBC मेडिकल ऑफिसर की प्रताड़ना से परेशान एक महिला डॉक्टर ने आत्महत्या का प्रयास किया। महिला डॉक्टर जाति से क्षत्रिय है। यदि यही मामला उल्टा होता तो इसमें जातिगत भेदभाव की बात की जाती, और बदले में आरक्षण मांगा जाता।
मामला कोलारस में मंगलवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे का है। यहां आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अटामानपुर में पदस्थ सीएचओ डॉ. शीतल सिसोदिया ने बीपी की गोलियां खा लीं। कुछ ही देर बाद वे तड़पने लगीं। साथी कर्मचारी उन्हें तत्काल खरई उप स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव ने प्राथमिक उपचार किया। फिर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। डॉ. शीतल एक साल के बच्चे की मां हैं। उनके पति डॉ. विकास तोमर ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. संजय राठौर और अकाउंटेंट संजय जैन पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए तेंदुआ थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
रात 11 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते थे
डॉ. शीतल के पति डॉ. विकास तोमर ने पुलिस को बताया कि कोलारस बीएमओ डॉ. संजय राठौर और अकाउंटेंट संजय जैन उनकी पत्नी को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। वे देर रात 11 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते थे। डॉ. विकास के अनुसार, गांव में नेटवर्क समस्या के कारण अगर पत्नी मीटिंग में शामिल नहीं हो पाती थीं, तो उन्हें नोटिस जारी कर वेतन काटने की धमकी दी जाती थी। एक साल का बच्चा होने के बावजूद वे रोज समय पर ड्यूटी जाती थीं और ईमानदारी से काम करती थीं। इसके बाद भी बार-बार नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई के चलते वे गहरे तनाव में थीं।
डॉ. विकास तोमर ने कहा कि यदि उनकी पत्नी को कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
इन आरोपों पर बीएमओ डॉ. संजय राठौर ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ कर्मचारियों से काम लेने के लिए नियमित निरीक्षण और गूगल मीट के माध्यम से बैठकें की जाती हैं। शीतल सिसोदिया को काम में लापरवाही पर नोटिस जरूर दिए गए हैं, लेकिन किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं काटा गया है।

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