भोपाल समाचार, 6 फरवरी 2026: मध्यप्रदेश शासन की दैनिक वेतन भोगियों को स्थायीकर्मी की योजना दिनांक 07.10.2016 पूरे प्रदेश में लागू की गई। जिसके बाद समस्त विभागों सहित उच्च शिक्षा विभाग द्वारा भी मध्यप्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगियों को स्थायीकर्मी की श्रेणी प्रदान की जा चुकी है ,परन्तु रामपुरा निवासी याचिकाकर्ता रविन्द्र कुमार जैन के साथ शासकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय रामपुरा जिला नीमच के प्राचार्य द्वारा भेदभाव किया जा रहा था और उन्हें स्थायीकर्मी की श्रेणी प्रदान नहीं की गई।
इस सबंध मे जनभागीदारी कर्मचारी संघ क़े प्रदेश मीडिया प्रभारी हितेश गुरगेला नें जानकारी देते हुए बताया है की जनभागीदारी कर्मचारी रविंद्र कुमार जैन नें एडवोकेट गौरव पांचाल के माध्यम से हाईकोर्ट इन्दौर के समक्ष रिट याचिका प्रस्तुत की गई, जिसमें याचिकाकर्ता को स्थायीकर्मी की श्रेणी देने के आदेश दिए गए थे परन्तु म.प्र.शासन द्वारा रिट याचिका के आदेश के विरूद्ध रिव्यू याचिका प्रस्तुत की गई। हाईकोर्ट इन्दौर द्वारा म.प्र. शासन की रिव्यू याचिका भी निराकृत कर दी गई और एरियर के बिना ही याचिकाकर्ता को स्थायीकर्मी की श्रेणी प्रदान करने का आदेश दिया गया। जिसका पालन नहीं करने पर याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत की गई अवमानना याचिका में रिट याचिका एवं रिव्यू याचिका से संबधित तथ्य याचिकाकर्ता के एडवोकेट गौरव पांचाल द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष बताए गए।
यह भी बताया कि याचिकाकर्ता को स्थायीकर्मी की श्रेणी नहीं देकर उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है जबकि याचिकाकर्ता को महाविद्यालय में कार्य करते हुए 10 वर्षो से अधिक समय व्यतीत हो चुके है प्राचार्य और आयुक्त द्वारा भारत के संविधान के अंर्तगत याचिकाकर्ता को दिए गए समानता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन हैं। तर्क श्रवण करने के पश्चात हाईकोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत अवमानना याचिका निराकृत कर उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं शासकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय रामपुरा जिला नीमच के प्राचार्य को आदेश को तीन माह में आदेश का पालन कर स्थायीकर्मी श्रेणी प्रदान करने के आदेश प्रदान किए गए है।
हाईकोर्ट द्वारा अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि उक्त अवधि के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है और याचिकाकर्ता को पुनः इस न्यायालय का रुख करना पड़ता है, तो यह पूरी तरह से उत्तरदाताओं के जोखिम और परिणामों पर होगा और वे स्वयं को उनके खिलाफ अवमानना प्रक्रिया शुरू करने के लिए उत्तरदायी ठहराएंगे।

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