भोपाल समाचार, 18 फरवरी 2026 : कुछ नेता हर रोज सुबह, दोपहर, शाम, लगातार यह कहते हैं कि, ब्राह्मण सत्ता के शिखर पर है और ब्राह्मणों को सपोर्ट करते हैं। ब्राह्मणों को आगे बढ़ाने वाली नीतियां बनाते हैं। सरकार में और सरकारी योजनाओं में ब्राह्मणों को प्रिविलेज दिया जाता है। यदि यह सही है तो बजट में किसी न किसी तरीके से ब्राह्मणों के लिए बड़े प्रावधान किए गए होंगे। आईए जानते हैं कि मध्य प्रदेश के बजट 2026 में ब्राह्मणों के लिए क्या है:-
ब्राह्मण या पुजारी वर्ग के लिए कोई प्रावधान नहीं
मध्य प्रदेश सरकार ने का कहना है कि बजट 2026-27 को "समृद्ध मध्य प्रदेश @2047" के विजन के साथ पेश किया है। अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के बजट में लगभग 400 करोड़ की वृद्धि के साथ, ₹2,591 करोड़ कर दिया गया है, इसी प्रकार आदिवासी वर्ग कल्याण के लिए भी बजट में वृद्धि हुई है। लेकिन बजट दस्तावेजों में 'ब्राह्मण' के नाम पर अलग से आवंटन का सीधा उल्लेख नहीं है। इसलिए ब्राह्मणों से संबंधित माने जाने वाले धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के बजट को अपन ब्राह्मणों के लिए आवंटित बजट मान लेते हैं।
मंदिरों के लिए 127 करोड़, उसमें पुजारी भी शामिल है
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग में वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान ₹88 करोड़ की तुलना में, इस वर्ष ₹127 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह विभाग मंदिरों के रखरखाव, पुजारियों के कल्याण और धार्मिक उत्सवों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। यह नोट कीजिए कि सिर्फ 127 करोड रुपए और उसमें मंदिरों के सभी धार्मिक उत्सव भी आयोजित करवाने हैं। दान पेटी की मदद नहीं मिलती क्योंकि दान पेटी सरकारी हो गई है। आप खुद कैलकुलेट कीजिए कि मध्य प्रदेश में कितने मंदिर और पुजारी के कल्याण के लिए प्रति पुजारी परिवार कितना पैसा खर्च कर पाएंगे।
कृपया नोट कीजिए:-
- सरकार की तरफ से पुजारी को, एक दिहाड़ी मजदूर से भी कम वेतन दिया जाता है।
- पुजारी के बच्चों को पढ़ने के लिए कोई स्कॉलरशिप नहीं दी जाती।
- निर्धन पुजारी को किसी प्रकार की सब्सिडी नहीं दी जाती।
- मुट्ठी भर पुजारी मध्य प्रदेश की संस्कृति और इतिहास की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से पुजारी के संरक्षण के लिए कोई काम नहीं किया जा रहा।
अनुसूचित जाति वर्ग के बजट में 400 करोड़ से ज्यादा की वृद्धि हुई है, जबकि धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग टोटल बजट वृद्धि के बाद 127 करोड़ हो पाया। कहां ₹2,591 करोड़, और कहां 127 करोड़।

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