Maha Shivratri 2026 पर पितृ दोष निवारण एवं शांति के उपाय, पूजा विधि

Updesh Awasthee
शास्त्रों में भगवान शिव को 'पितृेश्वर' और गया (पितृ तीर्थ) का अधिपति माना गया है। 'गदाधर पद्धति' और 'नारद पुराण' के अनुसार, पितरों की सद्गति भगवान विष्णु और शिव की कृपा के बिना संभव नहीं है। 'निर्णय सिंधु' जैसे ग्रंथों में उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति पितृ शांति के लिए शिव की शरण में जाता है, तो तामसिक बाधाओं और पितृ दोष का शमन होता है। इसलिए आज इस लेख में, मैं आपको महाशिवरात्रि के अवसर पर पितृ दोष की शांति हेतु विशेष पूजा उपाय के बारे में बता रहा हूं। 

महाशिवरात्रि पर पितृ दोष जनित कष्टों मुक्ति का मंत्र

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, महामृत्युंजय मंत्र का जाप न केवल व्यक्ति की रक्षा करता है, बल्कि उसके वंश के पूर्वजों को भी तृप्ति प्रदान करता है। महाशिवरात्रि पर इस मंत्र का अनुष्ठान पितृ दोष जनित कष्टों (जैसे वंश वृद्धि में रुकावट या रोग) में लाभकारी माना गया है। पितृ दोष जनित कष्टों की लिस्ट बहुत लंबी है, लेकिन आप सरल तरीके से समझ सकते हैं कि जब, ज्योतिष के अनुसार कोई महादशा, अंतर्दशा या गोचर नहीं है, आपकी तरफ से कोई गलती नहीं हो रही है लेकिन सफलता की प्राप्ति नहीं हो रही है, फल की प्राप्ति नहीं हो रही है, अप्रत्याशित रुकावटें आ रही है। तो इस प्रकार की परेशानियों को पितृ दोष जनित कष्ट माना जाता है। 

महाशिवरात्रि पर पितृ दोष शांति हेतु विशेष अनुष्ठान जो मान्य हैं

यदि आप इस दिन पितृ दोष निवारण के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित विधि शास्त्रों के अनुकूल है:
  • शिवलिंग पर जौ वाले जल से अभिषेक करें एवं निरंतर ओम नमः शिवाय का जाप करें। मन में पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करते रहें। यदि समय है और संभव है तो रुद्राभिषेक करें। 
  • शिव पुराण में यह भी लिखा है कि, जल अथवा दूध से किया गया रुद्राभिषेक, पितरों को शीतलता प्रदान करता है, लेकिन यह तब होता है जब आप अभिषेक के संकल्प के समय पितरों की शीतलता और शांति के लिए संकल्प करेंगे। 
  • भगवान शिव को काले तिल भी प्रिय है। शिवलिंग पर काले तिल और जल का अर्पण करना। काले तिल और जल से अभिषेक करना, पित्र शांति का सूक्ष्म माध्यम माना गया है। 

विशेष बात: शुद्ध रूप से 'पितृ तर्पण' या 'श्राद्ध' के लिए जो नियम अमावस्या के हैं, वे महाशिवरात्रि पर अनिवार्य नहीं हैं। महाशिवरात्रि एक 'व्रत' और 'उत्सव' है, इसलिए यहाँ कर्मकांड से अधिक 'भक्ति और शिव कृपा' के माध्यम से दोष निवारण पर बल दिया जाता है। उपरोक्त उपाय शिवरात्रि के अलावा चौदस के दिन भी कर सकते हैं, क्योंकि यह शिवरात्रि के लिए विशेष उपाय नहीं है लेकिन महाशिवरात्रि के योग का लाभ उठाया जा सकता है। प्रस्तुतकर्ता: आचार्य कमलांश (ज्योतिष शोधार्थी)। 
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