भोपाल, 23 फरवरी 2026: प्रॉपर्टी खरीदने से पहले, प्रॉपर्टी की लोकेशन और कीमत देखने के अलावा यह देखना भी जरूरी है कि जिस बिल्डर से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, उसकी अपनी प्रतिष्ठा कैसी है। MAA Jamuna Devi Construction से प्रॉपर्टी खरीदने वाले दो ग्राहक अनुचित व्यापार का शिकार हो गए। कंज्यूमर फोरम ने उनके हक में फैसला दिया है लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 साल लग गए। मामले में अपील हो गई तो न्याय होने में और समय लग सकता है।
बिल्डर और बैंक ने मिलकर गड़बड़ की, ग्राहक को परेशान होना पड़ा
अग्रवाल नगर निवासी चैतन्य कुमार पाराशर ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने मां जमुना देवी कंस्ट्रक्शन से, 3 मार्च 2017 को खजूरीकलां स्थित डुप्लेक्स प्लॉट 19ए के लिए राशि जमा की थी। 24 मार्च को कंस्ट्रक्शन कंपनी ने विक्रय पत्र दे दिया। लेकिन 9 अगस्त 2018 को आवास फाइनेंस लिमिटेड ने मजिस्ट्रेट आदेश के तहत नोटिस चस्पा कर दिया और 20 फरवरी 2019 को कब्जा लेकर उन्हें घर से बाहर कर दिया।
Maa Jamuna Devi Construction Bhopal , Unfair Trade Practices Case
जांच में सामने आया कि एग्रीमेंट 19ए का हुआ था, लेकिन बैंक और कंपनी ने असत्य सर्च रिपोर्ट के आधार पर प्लॉट नंबर 19 दर्शाकर लोन स्वीकृत करा लिया, जबकि उस मकान पर पहले से लोन था। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम भोपाल ने आदेश दिया की जमुना देवी कंस्ट्रक्शन चैतन्य को 24 लाख मूल राशि, 10 लाख अनुचित व्यापार के लिए, 50 हजार रुपए मानसिक कष्ट और 3 हजार रुपए वाद-व्यय दे। वहीं बैंक को 13 लाख रुपए चैतन्य के लोन अकाउंट में जमा करने के निर्देश दिए।
ग्राहक डुप्लेक्स खरीदने गया था, बदले में उसे कोर्ट केस मिला
नार्थ टीटी नगर निवासी दिलीप कुमार बॉथम ने अपनी शिकायत में बताएं कि उन्होंने 26 जुलाई 2017 को प्लॉट 25ए के लिए डेढ़ लाख रुपए अग्रिम जमा किए। कंपनी ने ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर निर्माण का आश्वासन दिया और विक्रय अनुबंध पत्र सौंपा। इसी आधार पर कंपनी ने बैंक से लोन स्वीकृत करा लिया, जिसकी जानकारी दिलीप कुमार को नहीं थी। बाद में पता चला कि प्लॉट 25 पहले से ही अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज था और सर्च रिपोर्ट में चारों सीमाएं अलग दर्शाई गई थीं। फोरम ने आदेश दिया कि कंपनी 18 लाख 50 हजार रुपए मूल राशि लौटाए, 10 लाख रुपए अनुचित व्यापार के लिए, 50 हजार रुपए मानसिक कष्ट और 3 हजार रुपए वाद-व्यय दे। बैंक को 12 लाख 50 हजार रुपए संबंधित लोन अकाउंट में जमा करने के निर्देश दिए गए।
खबर का सबक
इस खबर का पहला सबक तो यह है कि, बैंक और बिल्डर मिलकर चाहे कितनी भी गड़बड़ी कर लें, पकड़े जरूर जाते हैं। लेकिन दूसरा सबक ज्यादा महत्वपूर्ण है। खरीदारी को फैशन की शॉपिंग की तरह नहीं करना चाहिए। प्रॉपर्टी की लोकेशन और कीमत के अलावा यह भी देखना चाहिए कि जिस व्यक्ति से बात हो रही है, उसकी अपनी क्या प्रतिष्ठा है। संपत्ति का सौदा करते समय आपके साथ भी कोई अनुभवी और विशेषज्ञ होना चाहिए।

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