डॉ. शारदा मेहता: मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है। इसकी सुन्दरता अद्वितीय है। मोर का नृत्य तो मानव मन को आल्हादित कर देता है। आकाश में जब बादल दृष्टिगोचर होते हैं और वर्षा ऋतु का आगमन होता है तो मयूर नृत्य की सुन्दरता प्रकृति की शोभा में चार चाँद लगा देती है।
मोर पंख का आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व भी है। मोरपंख का संबंध श्रीकृष्ण, कार्तिकेय, गणेश, माता सरस्वती और माता लक्ष्मीजी से भी है। भगवान-श्रीकृष्ण तो मोर पंख को सिर पर धारण करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है। भगवान श्रीकृष्ण को बाल्यावस्था से ही कई राक्षसों का सामना करना पड़ा था। उनमें प्रमुख राक्षसों के नाम हैं- पूतना, शकटासुर, तृणावर्त, वत्सासुर, अधासुर, बकासुर, धेनुकासुर, अरिष्टासुर, कालियानाग, कालनेमि, व्योमासुर आदि। बालक श्रीकृष्ण को किसी की नजर न लगे इसलिए उन्हें सिर पर मोरपंख पहनाया जाता था। वर्तमान में भी नजर उतारने के लिए मोरपंख का उपयोग किया जाता है।
कार्तिकेय का वाहन ही मयूर है। उन्हें मयूरेश कहा जाता है। माता सरस्वती का वाहन मोर को भी माना जाता है। वे ज्ञान की देवी है। मोर के माध्यम से वे यह सन्देश देती है कि सुन्दरता, कला और चंचलता जो मोर के गुण है उन पर नियंत्रण होना भी आवश्यक है जिससे विनम्र होकर ज्ञानार्जन किया जा सके। श्रीगणेशजी और लक्ष्मीजी को कुछ चित्रों में हाथ में मोरपंख लिये दर्शाया जाता है, जो प्रतीकात्मक है। मोरपंख में यह शक्ति होती है यह नवग्रहों के बुरे प्रभाव को नष्ट करता है। मोरपंख को घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवग्रहों के दोषों को मोरपंख दूर करता है।
मोरपंख से वास्तु दोषों का भी निवारण किया जा सकता है। घरों में भगवान के मंदिरों में मोरपंख रखने से वातावरण में शान्ति बनी रहती है। घर के मुख्य द्वार पर भी मोरपंख लगाया जाता है। यह शुभता का प्रतीक है। राहू और केतू ग्रहों के दोषों को दूर करता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अध्ययन में एकाग्रता बनाए रखने के लिए बालकों के कक्ष में मोरपंख लगाना चाहिए। इससे अध्ययन में एकाग्रता का विकास होता है। जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने में मोरपंख की प्रमुख भूमिका रहती है। मोरपंख से निकलने वाली किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हैं। घरों में मोरपंख के प्रभाव से कीट पतंगें भी प्रवेश नहीं करते हैं। छिपकली तो उन्हें देख कर डरती है।
ऐसी मान्यता ज्योतिषशास्त्र में है कि तकिये के नीचे मोरपंख रखने से आर्थिक कष्ट कम हो जाता है। भाग्य में परिवर्तन होता है।
मोरपंख से निकलने वाली किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हैं। मोरपंख के चित्ताकर्षक रंग सभी आगन्तुकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ज्ञान की देवी सरस्वती और धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा घर में बनी रहे, इसलिए घरों में मोरपंख रखना सार्थक सिद्ध होता है। वर्तमान समय में भी बच्चों को नजर न लगे इसलिए मोरपंख से नजर उतारी जाती है और रामरक्षास्तोत्र का पाठ भी किया जाता है।
मोर का भगवान श्रीकृष्ण से विशेष सम्बन्ध है। कहा जाता है कि एक बार श्रीकृष्ण बाँसुरी बजा रहे थे। अचानक बाँसुरी की धुन पर सभी मोर नाचने लगे। उनमें से किसी एक मोर का पंख गिर गया, तब श्रीकृष्ण ने यह पंख अपने सिर पर धारण कर लिया। यह राधा और श्रीकृष्ण के प्रेम का परिचायक है।
हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर के सुन्दर पंख आयुर्वेद में औषधि के रूप में उपयोगी है। इन पंखों से भस्म बनाई जाती है, जिससे उपचार किया जाता है।
भारत सरकार ने एक फरवरी-1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया है क्योंकि अपनी सुन्दरता, भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में इसका अत्यधिक महत्व है। मोर को किसी भी प्रकार से आहत नहीं करना है। इस राष्ट्रीय पक्षी की सुरक्षा नई पीढ़ी के लिए अति आवश्यक है।
डॉ. शारदा मेहता
सीनि. एमआईजी-१०३, व्यास नगर,
ऋषिनगर विस्तार, उज्जैन (म.प्र.)

