जबलपुर, 2 फरवरी 2026: जबलपुर जिले के बरगी थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत क्षेत्र ग्राम सगड़ा-झपनी (Sagada Jhapni) में बरगी बांध की नहर टूट गई। इसके कारण लगभग आधा दर्जन गांवों (सगङा, झपनी, बम्हनोदा, रोसरा,चारघाट पिपरिया कला और घाना) में पानी भर गया। सैकड़ों किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के श्री राजकुमार सिन्हा का दावा है कि, यह हादसा नहर निर्माण में भ्रष्टाचार के कारण हुआ है।
मेंटेनेंस के बजट से किसका मेंटेनेंस हुआ
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) February 2, 2026श्री सिन्हा ने भोपाल समाचार डॉट कॉम को ईमेल के माध्यम से बताया कि, बरगी नहर का बार-बार टूटना सिर्फ एक तकनीकी दुर्घटना नहीं, बल्कि नहर निर्माण में व्याप्त भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर जवाबदेही तंत्र का गंभीर संकेत है। जबकि नहर के मेंटेनेंस के लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से प्रतिवर्ष बजट आवंटित किया जाता है। बरगी दायीं तट नहर का निर्माण जिन मानकों पर होना था, वे अधिकांश स्थानों पर सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गया।
नहर के निर्माण में यह गड़बड़ी हुई थी
नहर की लाइनिंग में घटिया सीमेंट, कम मोटाई के स्लैब और कमजोर तटबंध बनाए गए। जहां मिट्टी की प्रकृति और जल दबाव के अनुसार विशेष तकनीकी संरचना जरूरी थी, वहां लागत बचाने के नाम पर समझौता किया गया। नतीजा यह हुआ कि नहर पानी का दबाव झेल ही नहीं पाई और टूट गई।
अचानक कुछ नहीं हुआ, पहले से पता था नहर टूटेगी
नहर टूटने से पहले भी कई हिस्सों में रिसाव और धंसाव की शिकायतें थीं। मरम्मत के नाम पर लाखों के भुगतान हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर काम बहुत ही कम हुआ। बरगी नहर परियोजना में सबसे कम बोली प्रणाली के चलते ठेकेदारों ने अव्यवहारिक रूप से कम दरों पर काम लिया। बाद में लागत निकालने के लिए गुणवत्ता से समझौता किया गया।
Bargi Diversion Project 5000 करोड़ से ज्यादा का हो गया
ज्ञात हो कि दायीं तट मुख्य नहर को बरगी व्यपर्तन प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसकी लंबाई लगभग 197.4 किमी, 254.14 किमी शाखा नहर, 2700 किमी वितरण नेटवर्क और 3625 संरचनाएं शामिल हैं।इस बरगी व्यपर्तन प्रोजेक्ट की शुरूआती लागत 1101.23 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5127.22 करोड़ रुपए हो गया है।
36 साल बाद भी सतना और रीवा को एक बूंद पानी नहीं मिला
बरगी बांध 1990 में बनकर तैयार हो गया था। परन्तु 36 साल बाद भी सतना और रीवा के 885 गांव में सिंचाई के लिए एक बूंद पानी नहीं पहुंच पाया है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ मांग करता है कि स्वतंत्र और सार्वजनिक जांच हो,दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई हो, पारदर्शी ठेकेदारी व्यवस्था लागू की जाए और सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य बनाया जाए।
क्योंकि जब नहर नहीं, व्यवस्था ही सड़ चुकी हो, तो मरम्मत से नहीं, जवाबदेही से ही समाधान निकलेगा।

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