भोपाल समाचार, 2 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी श्री रामशरण प्रजापति और सब इंस्पेक्टर श्री केसी यादव के बीच में बड़ा विवाद हो गया है। श्री प्रजापति भोपाल देहात के पुलिस अधीक्षक हैं और श्री यादव सूखी सेवनिया थाने के सब इंस्पेक्टर। यह विवाद आबकारी एक्ट के तहत दर्ज किए गए एक मामले को लेकर हुआ है।
Ramsharan Prajapati IPS vs. KC Yadav SI, Bhopal
भोपाल जिले के सूखी सेवनिया थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर केसी यादव ने आईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी है। इसमें अपने साथ हुई बदसलूकी का जिक्र करते हुए लिखा- 14 सितंबर 2025 को एसपी रामशरण प्रजापति ने आबकारी एक्ट के एक अपराध की डायरी मंगाई थी। मीटिंग के बाद मैंने हाईकोर्ट में भेजने के लिए डायरी वापस मांगी तो एसपी ने इसे गुस्ताखी मानकर अपशब्द कहे और डायरी एसडीओपी मंजू चौहान से लेने के लिए कह दिया।
30 साल की नौकरी में मेरे साथ पहली बार इस तरह का दुर्व्यवहार हुआ है। मैंने व्यथित होकर आत्महत्या का मन बना लिया था, लेकिन स्टाफ के समझाने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण इरादा बदल दिया। फिर मैंने थाने के रोजनामचे में पूरी घटना दर्ज कर दी।
एसपी ने मुझे इतना प्रताड़ित किया कि अब दो ही रास्ते बचे हैं
एसआई यादव ने अपनी शिकायत में कई छोटे अफसरों को एसपी प्रजापति की प्रताड़ना का शिकार बताया है। उन्होंने लिखा- महिला अधिकारी भी परेशान हैं, लेकिन डर के कारण कोई सामने नहीं आ रहा है। पिछले चार महीने में एसपी ने मुझे इतना प्रताड़ित किया कि अब दो ही रास्ते बचे हैं। या तो अफसरों को सारी घटना बताकर उनसे न्याय मांगू या आत्महत्या कर लूं। मैंने न्याय के लिए अपनी आपबीती अफसरों के सामने रखी है। यदि न्याय नहीं मिला तो शिकायत को ही सुसाइड नोट मान लिया जाए।
Ramsharan Prajapati IPS vs Ashish Sapre TI BHOPAL
यह पहला मामला नहीं है, जब एसपी देहात रामशरण प्रजापति का नाम विवादों में आया हो। पिछले साल नवंबर में भोपाल देहात क्षेत्र में पदस्थ थाना प्रभारी आशीष सप्रे को लाइन अटैच करने का आदेश उन्होंने जारी किया था। आदेश में टीआई को तत्काल प्रभाव से लाइन में आमद देने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, 24 घंटे के भीतर ही यह आदेश निरस्त कर दिया गया। टीआई को लाइन अटैच करने की कार्रवाई पशु मेले को शिफ्ट कराने की धमकी देने और व्यापारियों से बदसलूकी के आरोपों के बाद की गई थी।
लाइन अटैच किए जाने की सूचना मिलते ही टीआई आशीष सप्रे ने आपत्ति जताते हुए एसपी कार्यालय पहुंचकर अपनी सफाई दी, लेकिन एसपी ने उनका पक्ष स्वीकार नहीं किया और आदेश पर कायम रहे। इस दौरान टीआई और एसपी के बीच तीखी नोक-झोंक होने की भी चर्चा रही।
थाना प्रभारी आशीष सप्रे को लाइन अटैच करने के मामले में अप्रत्याशित रूप से कुछ ही घंटे बाद एसपी कार्यालय से एक और आदेश जारी हुआ था। इसमें लाइन अटैच करने का आदेश निरस्त कर दिया गया। एसपी रामशरण प्रजापति ने इस फैसले को पूरी तरह प्रशासनिक दृष्टि से लिया गया फैसला बताया था। तब से टीआई सप्रे अपने पद पर यथावत हैं।
दरअसल, टीआई को लाइन हाजिर करने का आदेश सामने आने के बाद कई हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया था। संगठनों ने चेतावनी दी थी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो प्रदर्शन किया जाएगा।

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