इंदौर का अर्चना हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने नीलेश कोष्टी पर रहम करने से इनकार किया

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026
: साल 2009 की चर्चित मामलों में से एक अर्चना हत्याकांड (जिसमें पत्नी को किडनैप करके पति से फिरौती मांगी गई और फिर पत्नी की हत्या कर दी गई) के अपराधी नीलेश कोष्टी की याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी प्रकार का रहम करने से इनकार कर दिया।

नीलू @ नीलेश कोष्टी मामले की कहानी

यह मामला 25 जुलाई, 2009 को इंदौर से अर्चना @ पिंकी की गुमशुदगी से शुरू होता है। मृतका की माँ ने 28 जुलाई, 2009 को पुलिस स्टेशन परदेशीपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के दौरान पता चला कि अर्चना के मोबाइल से, उसके पति राजेश से 5 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही थी। पुलिस ने मोबाइल को ट्रैक किया और पाया कि अभियुक्त नीलेश कोष्टी ने उसे शेखर चौहान को बेच दिया था। 10 अगस्त, 2009 को नीलेश की गिरफ्तारी के बाद, उसके मेमोरेंडम बयान (धारा 27, साक्ष्य अधिनियम) के आधार पर इंदौर बाईपास रोड के पास एक कुएं से बोरे में बंद अर्चना का शव बरामद किया गया। इसके साथ ही अभियुक्त की निशानदेही पर वह स्कूटी भी बरामद हुई जिसे अर्चना चला रही थी। जांच के अनुसार, अभियुक्त और उसके साथी जय ने फिरौती के लिए अर्चना का अपहरण किया था, लेकिन बाद में सबूत मिटाने और पैसे अकेले हड़पने के लालच में उसकी हत्या कर दी।

अपीलकर्ता अभियुक्त की दलीलें
गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने में 3 दिन की अत्यधिक देरी हुई, जिसका कोई कारण नहीं दिया गया। फिरौती की कॉल के संबंध में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। शव क्षत-विक्षत अवस्था में था, इसलिए उसकी पहचान संदिग्ध है। पुलिस ने मोबाइल फोन की कॉल डिटेल (CDR) जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त नहीं किए।

प्रतिवादी राज्य सरकार की दलीलें
यह मामला परिस्थितियों की एक अटूट कड़ी पर आधारित है जो सीधे अभियुक्त की संलिप्तता दर्शाती है।अभियुक्त द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही शव और स्कूटी की बरामदगी हुई, जो उसकी अपराधी होने की पुष्टि करती है।

न्यायाधीश की विशेष टिप्पणियाँ और विश्लेषण

  • न्यायालय ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य के गायब होने पर लोग पहले खुद तलाश करते हैं, इसलिए 3 दिन की देरी मामले को खराब नहीं करती। 
  • धारा 27 (साक्ष्य अधिनियम) के तहत न्यायालय ने 'पुष्टि के सिद्धांत' (Doctrine of Confirmation) का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अभियुक्त की जानकारी पर कोई तथ्य (जैसे शव) बरामद होता है, तो वह उसकी सत्यता की गारंटी देता है।
  • न्यायालय ने चिकित्सा विज्ञान (Modi's Jurisprudence) का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि पानी में शव के सड़ने की प्रक्रिया हवा की तुलना में धीमी होती है। चूंकि अर्चना के चेहरे के कुछ हिस्से और उसके कपड़े (जींस और टी-शर्ट) सुरक्षित थे, इसलिए गवाहों द्वारा की गई पहचान पूरी तरह मान्य है।
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब परिस्थितियों की कड़ी पूरी हो, तो उद्देश्य (Motive) साबित करना अनिवार्य नहीं होता, हालांकि इस मामले में लालच और फिरौती का स्पष्ट उद्देश्य मौजूद था।

कोर्ट सजा कम नहीं करेगी सरकार चाहे तो माफ कर सकती है

उच्चतम न्यायालय ने अभियुक्त की अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालतों द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितियों की एक पूर्ण कड़ी स्थापित की है जिससे केवल अभियुक्त की ही दोषसिद्धि का निष्कर्ष निकलता है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि चूंकि अभियुक्त 15 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुका है, इसलिए उसे क्षमा (Remission) के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है, जिसे राज्य सरकार अपनी नीति के अनुसार विचार करेगी। 

नीलू @ नीलेश कोष्टी बनाम मध्य प्रदेश राज्य 

1. न्यायालय और न्यायाधीश का विवरण:
• न्यायालय: भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)।
• न्यायाधीश: माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और माननीय न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली।
• फैसला लिखा गया: न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा द्वारा।
• फैसले की तिथि: 20 फरवरी, 2026।
2. मुख्य किरदार और पक्षकारों की पहचान:
• अपीलकर्ता (अभियुक्त): नीलू @ नीलेश कोष्टी।
• प्रतिवादी: मध्य प्रदेश राज्य।
• मृतका: अर्चना @ पिंकी।
• भगवती बाई (P.W.4): मृतका की माँ, जिन्होंने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
• राजेश (P.W.12): मृतका का पति, जिससे फिरौती मांगी गई थी।
• दिलीप (P.W.2): मृतका का साढू (Brother-in-law), जिसने शव की पहचान की।
• अब्दुल वकील (P.W.9): मृतका का नियमित ऑटो ड्राइवर, जिसने शव की पहचान में मदद की।
• शेखर चौहान (P.W.6) और कृष्ण शर्मा (P.W.5): वे गवाह जिन्होंने अभियुक्त से मृतका का मोबाइल खरीदा था।
• इंस्पेक्टर एस.एम. जैदी (P.W.23): जांच अधिकारी (IO)।
• डॉ. एन.एम. उंडा (P.W.20): जिन्होंने पोस्टमार्टम किया।
• जय: अभियुक्त का मित्र और साजिश में कथित सहयोगी।
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