भोपाल समाचार, 25 फरवरी 2026 : मध्य प्रदेश विधानसभा में आज उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार की योग्यता और नियमों की समझ पर सवाल उठ गया। उन्होंने विधानसभा को मिस गाइड करने की कोशिश की लेकिन उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने बहस के दौरान ही उच्च शिक्षा मंत्री को क्लीन बोल्ड कर दिया। मामला विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर नियुक्ति का था। किस्सा बड़ा रोचक है, कृपया इसी अंदाज में पढ़िए:-
MP Assembly: Hemant Katare Corners Higher Education Minister
उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में यह तथ्य सामने आया कि नवगठित क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (80), सह-प्राध्यापक (40) और प्राध्यापक (20) के कुल 140 शैक्षणिक पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में ये सभी पद रिक्त हैं। कांग्रेस विधायक श्रीमती झूमा सोलंकी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 25 हजार विद्यार्थी वहां अध्ययनरत हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षकों और पाठ्यक्रमों के अभाव में उनका भविष्य अंधकारमय है।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन को मिस गाइड किया
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन को आश्वस्त किया कि भर्ती प्रक्रिया प्रचलन में है और सरकार ने सभी कुलपतियों (कुलगुरुओं) को 4 से 5 महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय एक 'स्वायत्त निकाय' (Autonomous Body) है और नियुक्तियों का निर्णय उनकी कार्य परिषद (Executive Council) द्वारा लिया जाता है, जिसमें शासन केवल उचित मार्गदर्शन दे सकता है।
विधानसभा में 'नियमों' पर मचा घमासान
नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सदन में उस समय विवाद गहरा गया जब विपक्ष ने कार्य परिषद के गठन पर सवाल उठाए:
• श्रीमती झूमा सोलंकी ने दावा किया कि विश्वविद्यालय में अभी तक कार्य परिषद (कमेटी) का गठन ही नहीं हुआ है, तो नियुक्तियों का निर्णय कौन लेगा?
• उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने नियम का हवाला देते हुए बताया कि नए विश्वविद्यालय के मामले में प्रथम दो वर्षों तक कार्य परिषद के समस्त अधिकार कुलगुरु (कुलपति) में निहित होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि चयन समिति में विशेषज्ञों की नियुक्ति राज्यपाल की अनुमति से होती है और अंत में कार्य परिषद इसका अनुमोदन करती है।
• कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने मंत्री के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि कार्य परिषद को सीधे नियुक्ति का अधिकार नहीं होता, वह केवल अनुमोदन करती है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि मंत्री जी सदन में "असत्य" बोल रहे हैं और उन्हें नियमों का सही ज्ञान नहीं है।
कटारे का चैलेंज आते ही मंत्री जी ने रास्ता बदल दिया
जैसे ही विधायक हेमंत कटारे ने उच्च शिक्षा मंत्री को नियमों के बारे में चुनौती दी और सदन के भीतर रिकॉर्ड पर कहा कि उनको नियमों का ज्ञान नहीं है, तो मंत्री श्री इंदर सिंह परमार कोई जवाब नहीं दे पाए। बैकफुट पर आ गए और फिर स्पष्टीकरण देने लगे कि, सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों को रोस्टर का पालन करते हुए पारदर्शी ढंग से विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने के सख्त निर्देश दिए हैं। वर्तमान में काम चलाने के लिए 7 पद प्रतिनियुक्ति से भरे गए हैं और 14 अतिथि विद्वान अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

