Gwalior High Court द्वारा 3 बीएड कॉलेजों की याचिकाएं खारिज, जीवाजी यूनिवर्सिटी का डिसीजन सही

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 7 फरवरी 2026
: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने जीवाजी विश्वविद्यालय के बीएड कॉलेजों की संबद्धता (Affiliation) से जुड़े एक बड़े विवाद में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। माननीय न्यायाधीश आनंद पाठक और माननीय न्यायाधीश आनंद सिंह बहरावत की युगलपीठ ने बीएड कॉलेजों और छात्रों द्वारा दायर कुल 6 याचिकाओं को खारिज करते हुए विश्वविद्यालय की कार्रवाई को सही ठहराया है। 

विवाद का कारण

न्यायालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए बीएड कोर्स की संबद्धता रोके जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। मुख्य याचिकाओं में स्वर्गीय सुरेंद्र प्रताप शिक्षा समिति, विद्यासुधा वेलफेयर फाउंडेशन समिति ग्वालियर और श्रीमती श्यामा देवी दीन दयाल बहुउद्देशीय प्रचार प्रसार समिति ग्वालियर शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, विकास जाटव, गिर्राज नागर और एकता अग्रवाल जैसे छात्रों ने भी अपनी ओर से याचिकाएं दायर कर राहत मांगी थी। 

वकीलों के मुख्य तर्क

याचिकाकर्ता (कॉलेज) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एम.पी.एस. रघुवंशी और श्री आर.बी.एस. तोमर ने तर्क दिया कि NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) ने संस्थानों को पहले ही मान्यता (Recognition) प्रदान कर दी है। उनका तर्क था कि केवल एसटीएफ (STF) द्वारा दर्ज आपराधिक मामलों के आधार पर विश्वविद्यालय संबद्धता नहीं रोक सकता।

• जीवाजी विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता श्री राहुल यादव और श्री तपन कुमार त्रिवेदी ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि कॉलेजों का निरीक्षण प्रतिवेदन संतोषजनक नहीं था और उनके पास बुनियादी ढांचे की भारी कमी थी। सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि कॉलेजों ने विश्वविद्यालय को NCTE का एक फर्जी पत्र (दिनांक 08.05.2025) सौंपा, जिसमें उनकी मान्यता बरकरार होने का झूठा दावा किया गया था।

• राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री अंकुर मोदी ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई का समर्थन किया। 

न्यायालय का कड़ा रुख और निर्णय

अदालत ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए इन संस्थानों को "शिक्षा प्रदान करने के नाम पर व्यावसायिक दुकानें" करार दिया। न्यायालय ने पाया कि:
1. इन कॉलेजों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी (IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-B) के तहत STF भोपाल द्वारा कई FIR दर्ज की गई हैं।
2. विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि संस्थानों ने NCTE का फर्जी ईमेल और पत्र तैयार किया ताकि वे संबद्धता प्राप्त कर सकें।
3. छात्रों द्वारा दायर याचिकाओं पर कोर्ट ने कहा कि उन्होंने संबद्धता की जांच किए बिना गलत कॉलेज चुने हैं। छात्र केवल फीस वापसी के हकदार हैं, लेकिन वे संबद्धता के बिना कोर्स जारी नहीं रख सकते। छात्रों का कहना था कि वह खुद धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। उनका संरक्षण मिलना चाहिए और किसी अन्य मान्यता प्राप्त कॉलेज से परीक्षा की अनुमति दी जानी चाहिए।

जुर्माना और भविष्य के निर्देश

न्यायालय ने सभी कॉलेज याचिकाकर्ताओं पर 25,000-25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे उन्हें 30 दिनों के भीतर 'जुवेनाइल जस्टिस फंड' (Juvenile Justice Fund) में जमा करना होगा। साथ ही, कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों से ली गई पूरी फीस तुरंत वापस करें। 

अदालत ने NCTE की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और निर्देश दिया कि वह इन दोषी संस्थानों के खिलाफ मान्यता वापस लेने की कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस फैसले के बाद, बिना संबद्धता वाले इन संस्थानों के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

समिति से संबंधित कॉलेज के नाम 

  1. PRATAP COLLEGE OF EDUCATION RUN BY LATE SURENDRA PRATAP SHIKSHA SAMITI, PLOT NO-44/4, STREET- KILA ROAD, VILLAGE- BARODA, POST OFFICE- BARODA, TEHSIL- BARODA, CITY- BARODA, DISTRICT: SHEOPUR- 476339, MADHYA PRADESH
  2. IDEAL COLLEGE RUN BY VIDHA SUDHA WELFARE FOUNDATION SAMITI ,village jarpura ,post-Soni, Tehsil-mehgawn Dist.- Bhind 
  3. MAA SARASWATI SHIKSHA MAHAVIDYALAYA RUN BY SMT. SHYAMA DEVI DEENDAYAL BAHU UDDESHIYA PRACHAR PRASAR SAMITI, PLOT NO109, STREET- GOHAR, VILLAGEGOHAR, POST OFFICE- GOHAR, TEHSILBEERPUR, CITY- BEERPUR, DISTRICT: SHEOPUR-476335, MADHYA PRADESH
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