ग्वालियर कलेक्टर की पॉलिटिक्स एक्सपोज, हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश रद्द किया

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 25 फरवरी 2026
: कलेक्टर का ईगो और पॉलिटिक्स देखिए। एक कर्मचारी ने डिप्टी कलेक्टर के कहने पर जनता के हित में काम कर दिया तो कलेक्टर इस प्रकार नाराज हो गई कि उन्होंने जनता के हित में काम करने वाले कर्मचारी को सजा सुना दी। जबकि इस प्रकार की कार्रवाई का अधिकार कलेक्टर को था ही नहीं। ग्वालियर हाई कोर्ट के विद्वान न्यायमूर्ति श्री आशीष श्रोति की एकल पीठ ने कलेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई के आदेश को रद्द कर दिया है। इसी के साथ एक्सपोज हो गया कि कलेक्टर ने यह कार्रवाई नियम के अनुसार नहीं बल्कि डिप्टी कलेक्टर के साथ चल रही पॉलिटिक्स के कारण की थी।

Collector’s Action Order Against Employee in Gwalior Quashed

याचिकाकर्ता निर्मल सिंह चौहान, जो ग्वालियर के पोस्ट-मैट्रिक बालक छात्रावास में वार्डन के पद पर कार्यरत थे, उन पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि उन्होंने छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग छात्रावास के रख-रखाव और मरम्मत कार्य के लिए किया, जिसे सरकारी धन का दुरुपयोग और कर्तव्य में लापरवाही माना गया। विभागीय जांच के बाद, कलेक्टर ने 20/12/2021 को एक आदेश पारित किया, जिसके तहत याचिकाकर्ता पर 'संचयी प्रभाव से चार वेतन वृद्धियों को रोकने' (Withholding of four increments with cumulative effect) का बड़ा दंड (Major Punishment) लगाया गया।

याचिकाकर्ता कर्मचारी ने इस दंड को चुनौती दी। अपीलीय प्राधिकारी ने 02/05/2023 को अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया और बड़े दंड को बदलकर 'बिना संचयी प्रभाव के दो वेतन वृद्धियों को रोकने' (Stoppage of two increments without cumulative effect) के लघु दंड (Minor Penalty) में बदल दिया। 

याचिकाकर्ता का पक्ष: ऊपर से आदेश आया था, अपनी मर्जी से नहीं किया

निर्मल सिंह चौहान ने अपनी दलील में कहा कि छात्रावास की खराब स्थिति को लेकर छात्रों ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी, जिसके बाद उन्होंने उच्च अधिकारियों (सहायक आयुक्त और डिप्टी कलेक्टर) के मौखिक निर्देशों पर मरम्मत कार्य करवाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रावास की बेहतरी के लिए किया गया था। 

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और कानूनी खामियां: 

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासनिक प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां पाईं:
1. अदालत ने माना कि कलेक्टर (प्रतिवादी क्रमांक 3) को तृतीय श्रेणी कर्मचारी पर केवल लघु दंड (Minor Penalty) लगाने का अधिकार था। हालांकि कलेक्टर बड़ी सजा की कार्रवाई शुरू तो कर सकते थे, लेकिन सजा देने के लिए मामला सक्षम अधिकारी को भेजा जाना चाहिए था।
2. कोर्ट ने पाया कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद जांच रिपोर्ट (Enquiry Report) की प्रति याचिकाकर्ता को नहीं सौंपी गई थी। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के 'ईसीआईएल बनाम बी. करुणाकर' मामले का हवाला देते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट न देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है और यह पूरी कार्रवाई को अवैध बना देता है।
3. याचिकाकर्ता ने जब इस सजा के खिलाफ अपील की, तो अपीलीय प्राधिकारी ने केवल अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर विचार किया और सजा को कम कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए अन्य मेरिट के आधारों पर कोई बात नहीं की, जिससे यह आदेश भी 'नॉन-स्पीकिंग' (बिना स्पष्ट आधार वाला) हो गया।

न्यायालय का अंतिम फैसला: 

हाईकोर्ट ने कलेक्टर द्वारा जारी सजा के आदेश (20/12/2021) और अपीलीय आदेश (02/05/2023) दोनों को निरस्त कर दिया है। अदालत ने मामले को वापस कलेक्टर के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को पहले जांच रिपोर्ट की कॉपी सौंपी जाए और उनका स्पष्टीकरण लेने के बाद ही कानून के अनुसार नए सिरे से कार्रवाई की जाए। 

निर्मल सिंह चौहान बनाम मध्य प्रदेश राज्य (WP 12832/2023) 

मामले से संबंधित सभी पक्षों, वकीलों और न्यायालय का विवरण स्रोतों के आधार पर निम्नलिखित है:
• न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खंडपीठ।
• पीठासीन न्यायाधीश: माननीय न्यायमूर्ति आशीष श्रोति।
• याचिकाकर्ता (Petitioner): निर्मल सिंह चौहान।
• प्रतिवादी (Respondents):
    1. मध्य प्रदेश राज्य।
    2. प्रतिवादी क्रमांक 2: अपीलीय प्राधिकारी (जिन्होंने सजा को संशोधित किया था)।
    3. प्रतिवादी क्रमांक 3: कलेक्टर (जिन्होंने आरोप-पत्र जारी किया और प्रारंभिक सजा दी थी)।
• याचिकाकर्ता के वकील: श्री डी.पी. सिंह।
• प्रतिवादी (राज्य) के वकील: सुश्री मोनिका मिश्रा (शासकीय अधिवक्ता)। 
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!