जबलपुर आदिवासी कल्याण घोटाले में डिप्टी डायरेक्टर की 12 करोड़ की संपत्ति कुर्क

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 13 फरवरी 2026
: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल आंचलिक कार्यालय ने आदिम जाति कल्याण विभाग, जबलपुर के पूर्व डिप्टी कमिश्नर जगदीश प्रसाद सरवते (सरवटे) पर शिकंजा कस दिया है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत सरवते की 11.81 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

भ्रष्टाचार की रकम से भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी में प्रॉपर्टी खरीदी

आय से अधिक संपत्ति का मामला यह पूरी कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), जबलपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की गई उस प्राथमिकी (FIR) पर आधारित है, जिसमें सरवते पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया गया था। ईडी की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सरवते ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध रूप से धन अर्जित किया और फिर उस 'दागी धन' को बेदाग संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए उसे रियल एस्टेट में निवेश किया।

निवेश का तरीका और संपत्तियों का विवरण जांच में सामने आया है कि जगदीश प्रसाद सरवते ने अवैध कमाई का इस्तेमाल मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में संपत्तियां खरीदने के लिए किया। ईडी के अनुसार कुल 9 अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं। इन संपत्तियों में रेजिडेंशियल बांग्ला, कृषि भूमि, कमर्शियल प्लॉट और रेस्तरां शामिल हैं। ये सभी प्रॉपर्टी भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी जिलों में स्थित हैं। 

ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए क्या-क्या किया

ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई संपत्तियों को भारी नकद भुगतान के माध्यम से खरीदा गया था। इतना ही नहीं, मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एक और तरीका अपनाया गया। कुछ संपत्तियों के लिए बैंक ऋण (ऋण) लिया गया था, जिसे बाद में अज्ञात नकद जमा के जरिए चुकाया गया। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य अपराध की कमाई को वैध संपत्ति के रूप में एकीकृत करना था। 

जगदीश प्रसाद सरवते पर दाग लगा है, दोषी घोषित नहीं हुए

वर्तमान स्थिति ईडी ने इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से इसलिए कुर्क किया है ताकि इनके हस्तांतरण या बिक्री को रोका जा सके और जब्ती की अंतिम कार्यवाही शुरू की जा सके। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी प्रक्रियाधीन है और आने वाले समय में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
यह कार्रवाई राज्य के सरकारी तंत्र में बैठे उन अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो अपने पद का लाभ उठाकर अवैध संपत्ति अर्जित करने में लगे हैं।
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