भोपाल समाचार, 24 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित Government Holkar Science College के प्रिंसिपल की कुर्सी की लड़ाई, अब हाईकोर्ट में चल रही है। इस बार उनको हाई कोर्ट से राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है और तब तक प्रोफेसर अनामिका जैन, होलकर कॉलेज की प्रिंसिपल रहेगी।
प्रोफेसर अनामिका जैन की कहानी
प्रोफेसर अनामिका जैन की नियुक्ति 1985 में असिस्टेंट प्रोफेसर केमिस्ट्री के रूप में हुई थी। 2006 में उन्हें प्रमोशन मिला और वह प्रोफेसर बन गई। 2024 में प्रधानमंत्री कॉलेज आफ एक्सीलेंस स्कीम के तहत सरकारी कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। प्रोफेसर अनामिका ने भी आवेदन किया और उनका सिलेक्शन हुआ। यानी कि यह कृपा पूर्वक मिला हुआ प्रभार नहीं था बल्कि एप्लीकेशन और सिलेक्शन की प्रक्रिया के बाद मिला अधिकार है। दिनांक 8 नवंबर 2024 को उन्होंने प्रभारी प्राचार्य पदभार ग्रहण किया। मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण विवाद के कारण शासन की ओर से उच्च पद पर सीधा प्रमोशन नहीं दिया जा रहा है बल्कि प्रभार और कार्यवाहक जैसे शब्दों का उपयोग किया जा रहा है।
लगभग 6 महीने बाद दिनांक 3 जून 2025 को प्रोफेसर अनामिका जैन का ट्रांसफर शाजापुर स्थित सरकारी कॉलेज में कर दिया गया। प्रोफेसर अनामिका ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इससे नाराज होकर दिनांक 12 सितंबर 2025 को उच्च शिक्षा विभाग के कमिश्नर ने उनसे प्राचार्य के पद का प्रभार वापस ले लिया और उन्हें अपने मूल पद (प्रोफेसर) पर काम करने का आदेश दिया। प्रोफेसर अनामिका जैन ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चैलेंज किया। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने प्रोफेसर अनामिका की याचिका को निरस्त कर दिया। प्रोफेसर अनामिका ने सिंगल बेंच के आदेश को भी चैलेंज किया। विद्वान न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने उच्च शिक्षा विभाग से इस मामले में जवाब मांगा है और आदेश दिया कि तब तक प्रोफेसर अनामिका, होलकर कॉलेज के प्रिंसिपल के पद पर काम करेंगे।
कुल मिलाकर कोर्ट में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों और महिला प्रोफेसर के बीच में संघर्ष चल रहा है। देखते हैं इस लड़ाई का फैसला क्या होता है और क्या दोनों पक्ष उस फैसले को स्वीकार करेंगे।
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