भोपाल समाचार, संवाददाता, 13 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत सेवाएं देने वाले आउटसोर्स कर्मचारी एक बार फिर सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। यह कर्मचारी संगठन स्वयं को 30000 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी का प्रतिनिधि बताता है।
सरकार 25000 देती है, कर्मचारियों को सिर्फ 12000 मिलते हैं
संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का आरोप है कि शासन किसी पद के लिए 20 से 25 हजार रुपए स्वीकृत करता है, लेकिन ठेकेदारी प्रथा और प्रशासनिक कटौती के चलते कर्मचारी के हाथ में मात्र आठ से 12 हजार रुपए ही आते हैं। बढ़ती महंगाई के बीच जहां नियमित कर्मचारियों का डीए बढ़ता है, वहीं इन आउटसोर्स कर्मियों का मानदेय बरसों से जस का तस बना हुआ है।
आउटसोर्स कर्मचारी के आंदोलन के छह चरण
संघ ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए छह चरणों में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है।
पहला चरण (9-10 फरवरी) तक रहेगा, जिसमें जिला स्तर पर सीएमएचओ को प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
दूसरा चरण (16-18 फरवरी) में प्रदेशभर में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे।
तीसरे चरण (23-24 फरवरी) में भोपाल में एनएचएम कार्यालय और उपमुख्यमंत्री के बंगले के सामने सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
चौथे चरण (दो मार्च) में जिला स्तर पर सरकार की नीतियों का पर्दाफाश किया जाएगा।
पांचवें चरण (10-11 मार्च) में कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपेंगे।
छठे चरण (सात अप्रैल) में भोपाल की सड़कों पर महा-आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा।
संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की मांगें
- ठेकेदारी प्रथा खत्म कर सीधा मानदेय भुगतान।
- काम के बदले समान और युक्तिसंगत पारिश्रमिक।
- सेवा नियम, महंगाई भत्ता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ।
- वेतन से होने वाली अनुचित कटौती पर तत्काल रोक।
निष्कर्ष: कर्मचारी संगठन और सरकार के बीच सामान्य बातचीत से समस्याओं का हल नहीं निकला है। अब संगठन अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने जा रहा है।

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