भोपाल समाचार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट, 13 जनवरी 2026: हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच के विद्वान न्यायाधीश श्री जय कुमार पिल्लई ने विवाह के बाद दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश में आने वाली विवाहित महिलाओं को सरकारी नौकरी में जाति प्रमाण पत्र के संबंध में 6 महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। हाई कोर्ट के यह लैंडमार्क डिसीजन जाति प्रमाण पत्र के संबंध में प्रचलित हजारों विवादों में उल्लेखनीय होंगे।
भर्ती विज्ञापन में जाति प्रमाण पत्र की शर्त नहीं तो सब स्वीकार्य: हाई कोर्ट
अनुसुइया प्रजापति बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य, याचिका नंबर: W.P. No. 10277/2021 मामले में याचिकाकर्ता अनुसुइया प्रजापति ने उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद हेतु आवेदन किया था। विवाद का मुख्य कारण यह था कि याचिकाकर्ता मूल रूप से दूसरे राज्य की निवासी थी और विवाह के बाद मध्य प्रदेश में बस गई थी, लेकिन दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान उसकी उम्मीदवारी केवल इसलिए रद्द कर दी गई क्योंकि उसने मध्य प्रदेश राज्य द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र के स्थान पर अपने मूल राज्य का जाति प्रमाण पत्र किया था। इस याचिका की सुनवाई माननीय न्यायाधीश जय कुमार पिल्लई द्वारा की गई। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि विज्ञापन में मध्य प्रदेश का ही जाति प्रमाण पत्र होने की कोई स्पष्ट शर्त नहीं थी, इसलिए उम्मीदवारी रद्द करना मनमाना है। न्यायालय ने रद्दीकरण आदेश को निरस्त कर दिया और अधिकारियों को 60 दिनों के भीतर जाति की पात्रता सत्यापित कर वरिष्ठता और काल्पनिक वेतन निर्धारण के लाभों के साथ नियुक्ति देने का निर्देश दिया।
कोई जाति दोनों राज्यों में आरक्षित है तो फिर कोई भी जाति प्रमाण पत्र मान्य होगा: हाईकोर्ट
श्रीमती सरिता मेहरा बनाम जनजातीय कार्य विभाग एवं अन्य, याचिका नंबर: W.P. No. 18396/2022 याचिका में भी विवाद का कारण शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान अन्य राज्य का जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी का निरस्त होना था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि विवाह के बाद उसे मध्य प्रदेश का अधिवास प्रमाण पत्र मिल चुका है, अतः वह आरक्षण की हकदार है। इस मामले की सुनवाई भी माननीय न्यायाधीश जय कुमार पिल्लई ने की। उन्होंने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई जाति दोनों राज्यों में आरक्षित है, तो तकनीकी आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने चयन निरस्त करने के आदेश को अवैध मानते हुए उसे रद्द कर दिया और वरिष्ठता लाभों के साथ नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने का आदेश दिया।
सरकारी नौकरी भर्ती मामले में नियम बीच में नहीं बदले जा सकते: हाई कोर्ट
श्रीमती रेनू मेवाती बनाम जनजातीय कार्य विभाग एवं अन्य, याचिका नंबर: W.P. No. 19690/2022 मामले में विवाद का कारण अधिकारियों द्वारा उनकी शिक्षक पद की पात्रता को केवल इसलिए अस्वीकार करना था क्योंकि उनका आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC) का प्रमाण पत्र उस राज्य का था जहाँ उनका जन्म हुआ था, न कि जहाँ उनकी शादी हुई। माननीय न्यायाधीश जय कुमार पिल्लई ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने फैसले में "खेल के नियम बीच में नहीं बदले जा सकते" के सिद्धांत का उल्लेख किया और कहा कि विज्ञापन के बाद नई शर्तें थोपना गलत है। न्यायालय ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता की जाति की स्थिति का मिलान करें और पात्र पाए जाने पर उन्हें परिणामी लाभों (consequential benefits) के साथ बहाल करें।
आरक्षण एक लाभकारी प्रावधान, उदारतापूर्वक लागू करें: हाईकोर्ट
श्रीमती विजेता श्रीवास्तव बनाम जनजातीय कार्य विभाग एवं अन्य, याचिका नंबर: W.P. No. 19986/2022 मामले में विवाद का कारण यह था कि याचिकाकर्ता ने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन दस्तावेज़ सत्यापन के समय मध्य प्रदेश का जाति प्रमाणपत्र न होने के कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया था। माननीय न्यायाधीश जय कुमार पिल्लई ने मामले की सुनवाई की। न्यायाधीश ने अपने फैसले में आरक्षण को एक "लाभकारी प्रावधान" बताते हुए कहा कि इसे उदार और उद्देश्यपूर्ण तरीके से लागू किया जाना चाहिए ताकि तकनीकी कारणों से किसी का अधिकार न छिपे। न्यायालय ने रद्दीकरण आदेश को रद्द करते हुए 60 दिनों के भीतर नियुक्ति और वरिष्ठता निर्धारण की कार्रवाई करने का आदेश दिया।
विज्ञापन की शर्तों में अन्य राज्य के जाति प्रमाण पत्र का उल्लेख अनिवार्य: हाईकोर्ट
श्रीमती अर्पिता कट्ठा बनाम जनजातीय कार्य विभाग एवं अन्य, याचिका नंबर: W.P. No. 20187/2022 मामले में विवाद का कारण उच्च माध्यमिक शिक्षक पद हेतु उनके चयन को इस आधार पर रद्द करना था कि उन्होंने विज्ञापन की शर्तों के विपरीत अन्य राज्य का जाति प्रमाण पत्र जमा किया था। इस याचिका की सुनवाई माननीय न्यायाधीश जय कुमार पिल्लई द्वारा की गई। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि विज्ञापन और भर्ती नियमों में ऐसी कोई बाध्यकारी शर्त नहीं थी कि प्रमाण पत्र केवल मध्य प्रदेश का ही होना चाहिए। न्यायालय ने चयन निरस्त करने के आदेश को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को उन सभी लाभों के साथ नियुक्ति देने का निर्देश दिया जो उनके साथ के अन्य उम्मीदवारों को मिले थे।
विवाहित महिला के मायके का जाति प्रमाण पत्र अस्वीकार करना अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन
श्रीमती कविता देवड़ा बनाम स्कूल शिक्षा विभाग एवं अन्य, याचिका नंबर: W.P. No. 4358/2023 इस मामले में विवाद का कारण याचिकाकर्ता की महिला उम्मीदवार के रूप में उम्मीदवारी का रद्दीकरण था, क्योंकि उन्होंने दस्तावेज़ सत्यापन के समय अपने मूल राज्य का जाति प्रमाण पत्र दिखाया था, जबकि वह विवाह उपरांत मध्य प्रदेश की निवासी हो चुकी थीं। माननीय न्यायाधीश जय कुमार पिल्लई ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने फैसले में इसे अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन माना और कहा कि अधिकारियों का यह कृत्य मनमाना है। न्यायालय ने आदेश दिया कि रद्दीकरण आदेश को निरस्त माना जाए और याचिकाकर्ता को वरिष्ठता व काल्पनिक वेतन लाभों के साथ सेवा में लिया जाए। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (पत्रकार एवं विधि सलाहकार, भोपाल)।
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