भोपाल समाचार, विधि संवाददाता, 13 जनवरी 2026: यदि सरकारी कर्मचारियों ने अपने कर्तव्य के दौरान कोई गलती की है और उसके लिए कर्मचारी को दंडित किया जा चुका है तो इसके आधार पर उसको पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता है। यह फैसला पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनाया और उस प्रमोशन लिस्ट को रद्द कर दिया जिसके माध्यम से पिटीशन फाइल करने वाले अधिकारी को उसके जूनियर का जूनियर बना दिया गया था।
कर्मचारी ने गलती की थी और उसे सजा भी मिल गई थी
याचिकाकर्ता ने पंजाब सरकार व अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ याचिका दायर कर वरिष्ठता सूची को रद्द करने की मांग की थी। उसके अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 1999 में प्लानिंग ऑफिसर के पद पर हुई थी। 2011 में सहायक टाउन प्लानर के रूप में पदोन्नति मिली और 12 दिसंबर 2019 को उसको एक वार्षिक वेतनवृद्धि (बिना भविष्य प्रभाव के) रोकने की सजा दी गई। इसके बावजूद वह असिस्टेंट टाउन प्लानर्स की अंतिम वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर था।
अक्टूबर 2020 में जब उसके कनिष्ठों को म्युनिसिपल टाउन प्लानर पद पर पदोन्नत किया गया, लेकिन उसको पदोन्नति से वंचित रखा गया। याचिकाकर्ता को बाद में दिसंबर 2021 में प्रमोशन दिया गया लेकिन अक्टूबर 2025 में जारी नई वरिष्ठता सूची में उसे फिर से उसके जूनियर्स का जूनियर दिखाया गया।
हाईकोर्ट (Justice Harpreet Singh Brar (जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्रार) – सिंगल बेंच) ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उस तिथि (अक्टूबर 2020) से म्युनिसिपल टाउन प्लानर पद पर पदोन्नत माना जाए, जिस दिन उसके कनिष्ठों को पदोन्नति मिली थी।
पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामूली दंड के कारण किसी सरकारी कर्मचारी को वरिष्ठता सूची में नीचे धकेलना या समय पर पदोन्नति से वंचित करना कानूनन सही नहीं है। अदालत ने कहा कि एक वार्षिक वेतनवृद्धि को बिना भविष्य प्रभाव के रोके जाने जैसी मामूली सजा का कर्मचारी की वरिष्ठता या पदोन्नति पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ सकता।
हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर 2025 को जारी उस वरिष्ठता सूची को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता अधिकारी को केवल मामूली सजा के आधार पर उसके कनिष्ठों से नीचे रखा गया था।
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