BHOPAL की हर्षा रिछारिया: धर्म के संकल्प को विराम देकर वापस अपना पुराना काम करूंगी

भोपाल समाचार, 13 जनवरी 2026:
प्रयागराज महाकुंभ से वायरल हुई हर्षा रिछारिया ने अब संत समाज से तौबा कर ली है। एक साध्वी का भेष धारण करके, महामंडलेश्वर साधुओं की संगत में दिखाई देने वाली हर्षा रिछारिया अब साधुओं की मंडली से बाहर निकलना चाहती है। हर्षा ऐलान कर दिया है कि वह, साधुओं की संगत को छोड़कर फिर से एंकरिंग करना शुरू करेगी। 

महाकुंभ से शुरू हुई मेरी यात्रा माघ मेला में खत्म होती है: हर्षा रिछारिया 

हर्षा रिछारिया इन दिनों प्रयागराज के माघ मेले में हैं और इस बार वह अपने भाई दीपक के साथ पहुंची हैं। वीडियो में उन्होंने कहा कि महाकुंभ से शुरू हुई उनकी यात्रा अब यहीं खत्म हो रही है। मैंने कोई गलत काम नहीं किया। न चोरी की, न किसी के साथ अन्याय किया, न कोई अनैतिक कार्य। फिर भी, जब-जब मैंने धर्म की राह पर आगे बढ़ने की कोशिश की, मुझे रोका गया, मेरे इरादों पर शक किया गया।

मैं सीता नहीं हूं, कर्ज में डूब गई हूं

हर्षा ने कहा कि समाज में किसी लड़की के चरित्र पर उंगली उठाना सबसे आसान होता है। मैं सीता नहीं हूं कि हर बार अग्नि परीक्षा दूं। हर्षा रिछारिया ने उन आरोपों पर भी खुलकर बात की, जिनमें कहा गया कि वह धर्म के नाम पर पैसा कमा रही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, लोगों को लगा कि मैं धर्म को बिजनेस बनाकर करोड़ों कमा रही हूं, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। आज मैं कर्ज में डूबी हुई हूं।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने वास्तव में धर्म को कमाई का साधन बना लिया है, उनके बीच वह अकेली बिना किसी सुरक्षा कवच के खड़ी रहीं।

मौनी अमावस्या के बाद नया अध्याय

हर्षा ने ऐलान किया कि मौनी अमावस्या के बाद वह आध्यात्मिक राह को छोड़कर अपने पुराने प्रोफेशन में लौटेंगी। उनके मुताबिक, यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया है, बल्कि लंबे आत्ममंथन के बाद आया है।उन्होंने कहा मैंने इस एक साल में बहुत कुछ सहा है। अब खुद को दोबारा खड़ा करना है। 

हर्षा रिछारिया साधुओं के संगत में कैसे पहुंची

हर्षा रिछारिया आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या रही हैं। महाकुंभ के दौरान उनकी मौजूदगी ने उन्हें अचानक सुर्खियों में ला दिया, लेकिन विवाद भी जुड़े। उनका कहना है कि धर्म के रास्ते पर चलना जितना शांत दिखता है, उतना ही कठोर भी है खासतौर पर तब, जब आप एक महिला हों। आस्था मेरी निजी यात्रा थी, लेकिन उसे सार्वजनिक बहस बना दिया गया।
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