भोपाल समाचार, 25 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश की पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगाते हैं क्योंकि वह नेताओं की भैंस ढूंढने निकल जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस के मामले में ऐसा नहीं है। गुना शहर में एक सरकारी शिक्षक के मंदिर से जूते चोरी हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया लेकिन तमाम इन्वेस्टिगेशन की, CCTV की रिकॉर्डिंग देखी और जूते ढूंढ कर ला दिए। माट्साब भी गजब थे। उन्होंने अपने जूते के लिए भगवान को ही टारगेट कर दिया था।
फ्लैशबैक, घटना का विवरण
शहर की विंध्याचल कॉलोनी में रहने वाले राजेश कुमार शर्मा ने कैंट थाने में आवेदन दिया था। अपने आवेदन में उन्होंने बताया था कि 30 दिसंबर को वह शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ शाम लगभग 6:50 बजे हनुमान टेकरी पर दर्शन करने गए थे। वह शाम को होने वाली आरती में शामिल हुए। लगभग 7:20 बजे वह मंदिर से नीचे उतरे। इस दौरान उन्होंने हाथ धुलने वाली जगह के पास अपने जूते उतारे थे, वह उन्हें नहीं दिखे। कोई अज्ञात व्यक्ति उनके जूते चोरी कर ले गया। लगभग 4 हजार रुपए से ज्यादा के जूते थे।
माट्साब ने पुलिस को लिखा, मेरे जूते ढूंढ कर लाओ ताकि भगवान पर मेरी आस्था बनी रहे
टीचर का कहना था कि उन्होंने आसपास और चौकीदार से पता किया, तो उनसे कहा गया कि यह तो रोज का काम है। कुछ बड़े बालाजी इलाके के रहने वाले हैं, वो लोग यही काम करते हैं। उनकी यह बात सुनकर टीके वापस आ गए। दुख इस बात का है कि तीसरी आंख (CCTV कैमरे) होते हुए भी श्रद्धा के केंद्र हनुमान टेकरी पर इस तरह की घटनाएं समस्त दर्शनार्थियों की भावना को ठेस पहुंचाती है। आवेदन के जरिए उन्होंने मांग की है कि उनके जूते ढूंढ़कर वापस दिलाए जाएं, जिससे उनकी आस्था बनी रहे।
आवेदन मिलने के बाद कैंट थाना पुलिस ने मामला तो दर्ज नहीं किया लेकिन काम पर लग गई। CCTV कमरे में रिकॉर्ड हुए वीडियो को दिखा। चोर की पहचान की, फिर उसकी तलाश की और उससे जूते प्राप्त किए। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह के ठीक 1 दिन पहले, जब पूरी पुलिस सिक्योरिटी में लगी रहती है, कैंट थाना पुलिस ने रविवार शाम शिक्षक राजेश कुमार शर्मा को कैंट थाने बुलाया और उन्हें जूते वापस सौंप दिए। पुलिस का कहना है कि चोरी चाहे छोटी हो या बड़ी, पुलिस हर मामले में शिद्दत से कार्रवाई करती है।
हाइलाइट्स पढ़िए मजा आएगा
- पिछले 3 महीने में गुना शहर में लगभग 50 चोरी की बड़ी घटनाएं हुई है। करोड़ों का माल चोरी हुआ है लेकिन पुलिस ने कोई सफलता प्राप्त नहीं की। बवाल काटने वाले मास्टर के जूते ला दिए और बयान देने लगे, कि चोरी चाहे छोटी हो या बड़ी, पुलिस हर मामले में शिद्दत से कार्रवाई करती है।
- पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया लेकिन इन्वेस्टिगेशन की। जूते मिल गए लेकिन चोर को नहीं पकड़ा। मास्टर जी भी जूते पाकर खुश हो गए। चोर समाज में खुला घूम रहा है, इस बात से मास्टर जी को भी कोई प्रॉब्लम नहीं है।
- ₹4000 के जूते के लिए माट्साब ने धरती आसमान एक कर दिया था। आवेदन में लिखा था, जूते ढूंढ कर लाइए ताकि मेरी आस्था बनी रहे। कोई शर्मा जी से पूछे, भगवान ने कहा था जूते पहनकर आना?
- शुक्र है मास्टर जी ने अपने डिपार्टमेंट से मुआवजा नहीं मांगा, वरना कह सकते थे कि मैं ऑन ड्यूटी था, विभाग के अधिकारियों के साथ में था। 4000 के जूते चोरी हुए हैं, मुझे मेरा मुआवजा चाहिए, ताकि संविधान पर आस्था बनी रहे।
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