उपदेश अवस्थी, 25 जनवरी 2026: हम भारत का 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। संविधान लागू हुआ और हमको अपने मौलिक अधिकार मिले लेकिन क्या आप जानते हैं 26 जनवरी 1950 को भोपाल में क्या हुआ था। नवाब तो भाग गया था, फिर 26 जनवरी को परेड की सलामी किसने ली। 26 जनवरी की परेड कहां पर हुई थी और उस दिन भोपाल में कैसा माहौल था। एवं सबसे बड़ी बात, धोखेबाज दोस्त खान के घरवाले क्या कर रहे थे।
26 जनवरी 1950 को तो भोपाल में ना नवाब था - ना सरकार, फिर क्या था
यह तो आप सब जानते ही हैं कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ तब भोपाल आजाद नहीं हुआ था। यहां का नवाब हमीदुल्लाह खान, भोपाल को पाकिस्तान में शामिल करना चाहता था। इसके लिए उसने बड़ी खतरनाक रणनीति बनाई थी परंतु मेवाड़ के राजा ने उसकी पूरी रणनीति फेल कर दी। फिर भोपाल में विलीनीकरण आंदोलन हुआ। 1 जून 1949 को भोपाल आजाद हुआ और भारत का हिस्सा बना। अच्छी बात है कि 26 जनवरी 1950 को जब भारत के सभी नागरिकों को उनके मौलिक अधिकार मिले, तब भोपाल के नागरिकों को भी फंडामेंटल राइट्स मिल गए थे। अब सवाल उठता है कि जब भोपाल का नवाब भाग गया था तो फिर भारत संघ में भोपाल की स्थिति क्या थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि, Original Constitution, 1950) के First Schedule में सभी राज्यों को चार श्रेणियों (A, B, C, D) में बांटा गया था। The Constitution of India (Original Text), 1950 के अनुसार भोपाल स्टेट Part C लिस्ट में शामिल था। यानी कि भोपाल स्टेट एक यूनियन टेरिटरी थी। भोपाल एक केंद्र शासित प्रदेश था।
26 जनवरी 1950 को भोपाल में गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह कहां पर हुआ
26 जनवरी 1950 को भोपाल में ना तो नवाब था ना ही सरकार थी, फिर भी गणतंत्र दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ और ऐतिहासिक तरीके से बनाया गया। मुख्य समारोह पुराने मिंटो हॉल के मैदान में आयोजित किया गया। उस जमाने में मिंटो हॉल भोपाल की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र था। मुख्य समारोह भले ही मिंटो हॉल के मैदान में था लेकिन गणतंत्र दिवस पूरे भोपाल में मनाया जा रहा था। पुराने भोपाल में हिंदू और मुसलमान सबके घर पर तिरंगा लहरा रहा था। लोग नए कपड़े पहनकर मिंटो हॉल मैदान की तरफ जा रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे ईद और दिवाली एक दिन मनाए जा रहे हैं। भोपाल के स्कूल कॉलेज में देर शाम तक सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे।
26 जनवरी 1950 को भोपाल में झंडा किसने फहराया
भोपाल में ना तो नवाब था और ना ही जनता की सरकार। भोपाल एक केंद्र शासित प्रदेश था और राष्ट्रपति महोदय के प्रतिनिधि के तौर पर यहां पर मुख्य आयुक्त की नियुक्ति की गई थी। श्री एन.बी. बनर्जी (N.B. Bannerji) को भोपाल स्टेट का Chief Commissioner बनाकर भेजा गया था इसलिए मुख्य आयुक्त ने ही तिरंगा फहराया और 'गार्ड ऑफ ऑनर' की सलामी ली।।
26 जनवरी 1950 को पहली बार भोपाल में जन गण मन गाया गया
भोपाल के नवाब ने भारत के आजाद होने के बाद भी भोपाल में तिरंगा लहराने और वंदे मातरम बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया था। ऐसा करने वालों को गोली मार दी जाती थी। 26 जनवरी 1950 को भोपाल में पहली बार आधिकारिक तौर पर सामूहिक रूप से 'जन गण मन' गाया गया, जो उपस्थित भीड़ के लिए एक भावनात्मक क्षण था।
26 जनवरी 1950 को नवाब हमीदुल्लाह खान का परिवार क्या कर रहा था
कहते हैं कि नवाब हमीदुल्लाह खान डिप्रेशन में चले गए थे लेकिन इतिहास की कुछ किताबों में यह भी लिखा था कि, नवाब साहब अहमदाबाद पैलेस (कोह-ए-फिजा) या अपने शिकारगाह चिकलोद कोठी में समय बिता रहे थे, और अपनी उत्तराधिकारी बेटी आबिदा सुल्तान के साथ प्रॉपर्टी का हिसाब किताब कर रहे थे। 26 जनवरी 1950 को भोपाल की जनता का उत्साह देखने के बाद आबिदा सुल्तान को समझ में आ गया था कि अब भोपाल में जीवन यापन मुश्किल होगा इसलिए मार्च 1950 में वह हमेशा के लिए पाकिस्तान चली गई।
दूसरी बेटी साजिदा सुल्तान, अपने पति (पटौदी के नवाब इफ्तिखार अली खान की पत्नी और सैफ अली खान की दादी) के साथ मैरिड लाइफ का आनंद ले रही थी। उसको भोपाल से कोई मतलब नहीं था।
सबसे छोटी बेटी राबिया सुल्तान, को भोपाल से प्यार था। उसने भोपाल नहीं छोड़ा और भोपाल ने भी राबिया सुल्तान को उतना ही प्यार दिया। 2001 तक राबिया सुल्तान के जीवन काल में भोपाल ने उनके सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ी। राबिया सुल्तान को आज भी भोपाल में बड़े सम्मान के साथ पुकारा जाता है।
लेखक श्री उपदेश अवस्थी ने भोपाल के इतिहास पर कई आर्टिकल लिखें।
सोर्स: भोपाल के प्रथम गणतंत्र दिवस (1950), नवाब परिवार और प्रशासनिक इतिहास को प्रमाणित करने वाले प्रमुख स्रोतों (Sources) की सूची नीचे दी गई है। इन्हें आप पुस्तकालयों, सरकारी अभिलेखागारों या कानूनी दस्तावेजों में देख सकते हैं:
1. आधिकारिक सरकारी दस्तावेज (Official Records)
The Constitution of India (Original 1950 Text): इसकी 'प्रथम अनुसूची' (First Schedule) प्रमाणित करती है कि 26 जनवरी 1950 को भोपाल एक 'Part-C State' बना था।
Bhopal State Gazetteer (1950-1956): यह उस समय के प्रशासनिक बदलावों, मुख्य आयुक्त (Chief Commissioner) की नियुक्ति और सरकारी समारोहों का प्राथमिक स्रोत है।
White Paper on Indian States (1950): भारत सरकार के रियासत मंत्रालय (Ministry of States) द्वारा जारी, जिसमें भोपाल के विलीनीकरण और गणतंत्र बनने की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट है।
2. ऐतिहासिक पुस्तकें (Historical Books)
"The Story of the Integration of the Indian States" - लेखक: वी.पी. मेनन (V.P. Menon): मेनन सरदार पटेल के सलाहकार थे। इस पुस्तक में भोपाल के भारत में विलय (1949) और उसके बाद 1950 की स्थिति का विस्तृत विवरण है।
"History of the Madhya Pradesh Police (1817–1961)" - लेखक: एस.सी. विद्यार्थी: यह पुस्तक 1950 में हुई पुलिस परेड और तत्कालीन सुरक्षा व्यवस्था के बारे में तकनीकी जानकारी प्रदान करती है।
"Bhopal: Past and Present" - लेखक: सैयद अशफाक अली: भोपाल के इतिहास पर यह सबसे प्रामाणिक स्थानीय पुस्तकों में से एक मानी जाती है।
3. शाही परिवार और संस्मरण (Biographies & Memoirs)
- "The Last Nawab of Bhopal" - लेखक: शहरयार खान (Shaharyar Khan): नवाब हमीदुल्लाह खान के पोते और पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव द्वारा लिखित। इसमें नवाब परिवार की निजी स्थिति और 1950 के दौरान उनके मानसिक द्वंद्व का विवरण है।
- "Memoirs of a Rebel Princess" - लेखिका: आबिदा सुल्तान (Abida Sultan): नवाब की सबसे बड़ी बेटी की आत्मकथा, जिसमें उन्होंने भोपाल छोड़ने के निर्णय और 26 जनवरी 1950 के आसपास के पारिवारिक माहौल का उल्लेख किया है।
4. स्थानीय संस्थान और डिजिटल स्रोत
- राज्य अभिलेखागार, भोपाल (State Archives of Madhya Pradesh): यहाँ 1950 के समाचार पत्रों (जैसे नदीम और द हितवाद) की माइक्रोफिल्म्स उपलब्ध हैं, जिनमें गणतंत्र दिवस समारोह की रिपोर्ट छपी थी।
- राजभवन मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट: यहाँ भोपाल के 'मुख्य आयुक्तों' (Chief Commissioners) की सूची और 1950 के कालखंड का संक्षिप्त इतिहास दिया गया है।
- National Archives of India (NAI): गृह मंत्रालय (MHA) की 1949-50 की फाइलें, जो भोपाल के प्रशासनिक हस्तांतरण से संबंधित हैं।
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