Madhya Pradesh: खाद के लिए किसानों को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, ऑनलाइन टोकन मिलेगा

Updesh Awasthee
भोपाल, 02 जनवरी 2026:
राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केन्द्र बेरखेड़ी कला भोपाल मे उर्वरक वितरण की ई-विकास प्रणाली संबंधी प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिसमें उर्वरक वितरण की ई-विकास पर agristack पर किसानों का पंजीयन अनिवार्य किया है। 

ऑनलाइन सिस्टम 1 जनवरी से लागू

भोपाल संभाग के सभी जिले के कृषि, एम.पी.एग्रो., विपणन एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी शामिल हुए। जिन्हे ई-टोकन व्यवस्था की जानकारी दी। संभाग के पायलेट प्रोजेक्ट मे शामिल जिला विदिशा के अधिकारियों से इनमें आने वाली चुनौतियों की जानकारी लेकर उनके निराकरण बताए। सभी अधिकारी अपने जिले के किसानों को अपडेट करते हुए उन्हे ई-टोकन प्रणाली से जोड़ेगे तथा इसी के माध्यम से खाद का वितरण करेगें। उक्त प्रणाली 01 जनवरी 2026 से लागू किया गया है।

agristack पर पंजीयन कैसे होगा

संयुक्त संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास भोपाल संभाग ने बताया कि किसान जिस समिति का ड्यू सदस्य है, उसे संबंधित समिति पर ही खाद बुक करना होगा। खरीफ सीजन में ली खाद की लिमिट पूरी हो चुकी है, तो नकद राशि जमा कर लिमिट खुलवाना होगी। प्राप्त ई-टोकन की वैद्यता 3 दिन की ही रहेगी। जिन किसानों को पोर्टल पर जमीन रिकॉर्ड दिखाई न दें, उन्हे पटवारी से संपर्क कर पहले agristack पर पंजीयन करना होगा, इसके बाद ही योजना से जुड़ सकेगें।

etoken.mpkrishi.org पोर्टल रजिस्ट्रेशन का तरीका

संयुक्त संचालक, कृषि ने बताया कि अब किसान घर बैठे ई-टोकन बुक करा सकेंगे। किसान ई-विकास प्रणाली अंतर्गत किसान etoken.mpkrishi.org पोर्टल पर जाकर अपने आधार कार्ड के माध्यम से पंजीयन करवा सकेगे, ओटीपी सत्यापन के बाद agristack से प्राप्त भू-अभिलेख से जानकारी लेकर आधार और मोबाइल नंबर का सत्यापन करना होगा। रकबा और फसल के आधार पर खाद की मात्रा आएगी। इसकी पुष्टि करते ही दुकान या संस्था को चुनाव करके जनरेट विकल्प दबाना होगा। ऐसा करते ही ई-टोकन मिल जाएगा। 

जिन किसानों के पास एंड्रायड मोबाइल नही है, उन्हे कियोस्क सेंटर के माध्यम से ई-विकास पंजीयन कर सकते है, इसके लिए उन्हें फीस चुकाना होगी। ई-विकास प्रणाली से किसानों को टोकन के लिए आधी रात में कतार पर खड़ा होना नही पड़ेगा। घर बैठे ही किसान अपने मोबाइल क्यूआर कोड स्केन कर टोकन बुक कर सकेंगे। खाद का उपलब्धता की जानकारी उन्हें मिल जाएगी। जिससे किसान अपनी पंसद की समिति या दुकान को चुन सकेंगे।
रिपोर्ट: विजय/संतोष मिश्रा। 
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