भोपाल, 6 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश सरकार के सबसे पावरफुल मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा के क्षेत्र भागीरथपुरा में, नर्मदा पाइपलाइन में शौचालय के पानी की मिलावट और इसके कारण 6+11=17 लोगों की मौत के मामले में सरकार ने हाई कोर्ट में अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। इस जवाब से नाराज होकर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को तलब कर लिया है।
हाई कोर्ट में नगर निगम का जवाब
नगर निगम की ओर से कोर्ट में बताया गया कि मामला सामने आने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए स्वच्छ पेयजल की सप्लाई शुरू की गई। 30 दिसंबर को 36, 31 दिसंबर को 34 और 1 जनवरी को 33 टैंकरों से पानी भेजा गया। टैंकरों से पानी सप्लाई के फोटो भी निगम की ओर से पेश किए गए। स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि मामले में कार्रवाई की गई है। जोन-4 के जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड किया गया है। वहीं, सब इंजीनियर की शिव समाप्त की गई है।
नगर निगम के जवाब से हाई कोर्ट असंतुष्ट
नगर निगम के जवाब से हाई कोर्ट असंतुष्ट रहा। हाई कोर्ट का कहना है कि कितना पर्याप्त नहीं है। टैंकर की सप्लाई समस्या का समाधान नहीं है। यह लिमिटेड टाइम के लिए दी गई राहत है। हाईकोर्ट ने कहा कि, इस घटना ने शहर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है, लेकिन अब दूषित पेयजल की वजह से यह पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है। पीने का पानी ही अगर दूषित हो तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। हम इस मामले में मुख्य सचिव को सुनना चाहते हैं, क्योंकि यह समस्या सिर्फ शहर के एक हिस्से तक सीमित नहीं है। दरअसल, पूरे इंदौर शहर का पीने का पानी सुरक्षित नहीं है। कोर्ट ने 15 जनवरी को मुख्य सचिव को तलब किया है। वह वर्चुअली हाजिर हो सकते हैं।
अभी भी पानी पीने के लायक नहीं है: याचिकाकर्ता
31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को यह निर्देश दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी है कि प्रभावित क्षेत्र में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह दूषित है, न कि स्वच्छ और पीने योग्य।
महापौर ने प्रस्ताव भेजा था लेकिन मंत्री ने फंड नहीं दिया
अन्य याचिकाओं में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि इस घटना से पहले ही स्थानीय निवासियों की ओर से कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने उन पर कोई संज्ञान नहीं लिया। अगर समय रहते इन शिकायतों पर संज्ञान लिया गया होता और उचित रोकथाम के कदम उठाए गए होते तो यह घटना ही नहीं होती। सीनियर काउंसिल ने यह भी कोर्ट को बताया कि 2022 में महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव द्वारा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण यह काम अब तक नहीं हो पाया। याचिका में नहीं बताया गया कि फंड कहां से जारी होना था लेकिन मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार फंड नगरीय प्रशासन मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा जारी किया जाना था।
इंदौर में पानी के 60 में से 59 सैंपल फेल
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि साल 2017-18 में इंदौर के अलग-अलग इलाकों से पानी के 60 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी तर्क रखा कि इस मामले में संबंधित अधिकारी केवल नागरिक (सिविल) जिम्मेदारी के ही नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के भी दोषी हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है।
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