चेन्नई, 5 जनवरी 2026: मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कहा है कि सरकार या अधिकारी अंधविश्वास या लोगों की बेबुनियाद डर की वजह से कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। यह मामला चेन्नई के एन्नोर इलाके में रहने वाले ए कार्तिक का है, जिनके घर से हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां जब्त कर ली गई थीं।
अधिकारियों ने मूर्तियां जब्त कर लीं
पड़ोसियों ने शिकायत की थी कि इन मूर्तियों की स्थापना और पूजा के बाद इलाके में कुछ असामान्य मौतें हुई हैं, इसलिए ये मूर्तियां नुकसान पहुंचा रही हैं। कार्तिक ने अपने घर में शिवशक्ति दक्षिणेश्वरी, विनायगर और वीरभद्रन की मूर्तियां रखी थीं। वे खुद शांतिपूर्वक पूजा करते थे और जो पड़ोसी या भक्त चाहते थे, उन्हें भी आने देते थे। लेकिन लोकल लोगों की शिकायत पर अधिकारियों ने मूर्तियां जब्त कर लीं।
सरकार को अंधविश्वासों के आगे झुकना नहीं चाहिए
जस्टिस डी भारथा चक्रवर्ती ने अपने फैसले में कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने घर में मूर्ति रखकर खुद या इच्छुक दोस्तों-पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्वक पूजा करता है, तो बहुमत के दबाव में कोई कानून हाथ में नहीं ले सकता। सरकार को ऐसे अंधविश्वासों के आगे झुकना नहीं चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "भगवान या मूर्ति कभी किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाते, ये सिर्फ अंधविश्वास हैं जो सच्ची भक्ति या विज्ञान से मेल नहीं खाते।"
कोर्ट ने संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का फर्ज है कि लोगों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे। पहले अप्रैल 2025 में कोर्ट ने मूर्तियां वापस करने का आदेश दिया था, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो कार्तिक ने कोर्ट की अवमानना की याचिका दाखिल की। पड़ोसी हिंसा की धमकी दे रहे थे, इसलिए पुलिस प्रोटेक्शन की मांग भी की गई।
अब कोर्ट ने मूर्तियां तुरंत वापस करने का आदेश दिया है। हालांकि कुछ शर्तें लगाई गई हैं। पूजा में लाउडस्पीकर नहीं, शोर-शराबा नहीं, पड़ोसियों को परेशानी नहीं और पब्लिक से पैसे इकट्ठा नहीं करने चाहिए। अगर कोई अनधिकृत निर्माण है तो उस पर अलग से कानून के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है, लेकिन शांतिपूर्वक निजी पूजा पर रोक नहीं।
यह फैसला निजी आस्था की आजादी की रक्षा करता है और अंधविश्वास के खिलाफ मजबूत संदेश देता है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो अपने घर में अपनी मान्यताओं के मुताबिक पूजा करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं:
इस फैसले को लोग काफी सराह रहे हैं।
@MeghUpdates ने पोस्ट किया कि कोर्ट ने कहा सरकार घर में शांतिपूर्वक मूर्ति पूजा में दखल नहीं दे सकती, अंधविश्वास या बहुमत के दबाव में नहीं झुक सकती। इस पोस्ट को हजारों लाइक्स और रीपोस्ट मिले।
@adityasvlogs ने इसे व्यक्तिगत आस्था की बड़ी जीत बताया और कहा कि अंधविश्वास पर तर्क की जीत हुई।
@Career247Offici और @krishnakamal077 ने भी यही बात शेयर की। ज्यादातर लोग इसे संवैधानिक आजादी और विवेक की जीत बता रहे हैं।
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