भोपाल समाचार, विज्ञान विभाग, 20 जनवरी 2026: सोना केवल इसलिए मूल्यवान नहीं है क्योंकि पृथ्वी पर उसकी उपलब्धता बहुत कम है बल्कि इसलिए मूल्यवान है क्योंकि वह उसमें रासायनिक निष्क्रियता (Inertness) का गुण है। इसका मतलब हुआ कि सोने पर किसी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, सोना एक अमर धातु है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने गोल्ड हाइड्राइड (Gold Hydride) का निर्माण करने में सफलता प्राप्त कर ली है। यह बहुत बड़ी बात है जो सोने का भविष्य बदल सकती है।
मुख्य समाचार:
लंबे समय से वैज्ञानिक प्रयोगों में सोने का उपयोग इसलिए किया जाता था क्योंकि माना जाता था कि यह किसी भी स्थिति में प्रतिक्रिया नहीं करता। लेकिन साल 2025 के अंत में शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस धारणा को बदल दिया है। उन्होंने प्रयोगशाला में सोने और हाइड्रोजन का पहला पुष्ट ठोस-अवस्था यौगिक (Solid-state compound), 'गोल्ड हाइड्राइड' (Au₂Hx) तैयार किया है।
कैसे हुआ यह चमत्कार
यह खोज सामान्य वातावरण में नहीं, बल्कि यूरोपियन XFEL (एक शक्तिशाली एक्स-रे लेज़र) की मदद से की गई। शोधकर्ताओं ने डायमंड एनविल सेल के भीतर 40 गिगापास्कल (GPa) से अधिक का दबाव और 2,200 केल्विन से अधिक का तापमान पैदा किया। यह स्थितियाँ वैसी ही हैं जैसी हमारे सौरमंडल के विशाल गैस ग्रहों (Gas Giants) के आंतरिक भाग में पाई जाती हैं।
इस महान प्रयोग की बड़ी बातें:
• अनोखी संरचना: इस प्रक्रिया में सोने ने अपनी पारंपरिक संरचना को छोड़कर एक हेक्सागोनल (Hexagonal) संरचना अपना ली।
• सुपरयोनिक हाइड्रोजन: वैज्ञानिकों ने देखा कि इन चरम स्थितियों में हाइड्रोजन 'सुपरयोनिक अवस्था' में पहुँच गया, जहाँ वह सोने के ठोस ढांचे के भीतर एक द्रव की तरह स्वतंत्र रूप से गति कर रहा था।
• प्रतिवर्ती प्रक्रिया (Reversibility): जैसे ही दबाव और तापमान को सामान्य किया गया, यह यौगिक वापस अपने मूल सोने के रूप में लौट आया।
वैज्ञानिकों का क्या कहना है
SLAC नेशनल एक्सीलरेटर लैबोरेटरी के मुख्य लेखक मुंगो फ्रॉस्ट ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह खोज उन सभी पुराने प्रयोगों के पुनर्मूल्यांकन की मांग करती है जहाँ सोने को निष्क्रिय मानकर इस्तेमाल किया गया था।
इस खोज का महत्व:
यह खोज केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। यह ग्रहों के विज्ञान (Planetary Science) में मदद करेगी कि कैसे ग्रहों के कोर में हाइड्रोजन धातुओं के साथ व्यवहार करती है। साथ ही, फ्यूजन ऊर्जा (Fusion Science) के क्षेत्र में भी यह हाइड्रोजन के व्यवहार को समझने के लिए एक मानक (Calibration) के रूप में काम आ सकता है।
वैज्ञानिक अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इस नए 'गोल्ड हाइड्राइड' में सुपरकंडक्टिविटी जैसे कोई और क्रांतिकारी गुण छिपे हैं।
एक इमेज जो सब कुछ समझा देती है
फोटो विवरण - एक एक्स-रे फ्री-इलेक्ट्रॉन लेजर (बाएं) से निकलने वाली तेज़ पल्स से हाइड्रोकार्बन के कंप्रेस्ड सैंपल को बहुत ज़्यादा तापमान पर गर्म करने का इलस्ट्रेशन, जिसके परिणामस्वरूप सोना और हाइड्रोजन मिलकर गोल्ड हाइड्राइड बनाते हैं (बीच में)। सोने के एटम, जिन्हें सोने के रंग में दिखाया गया है, एक हेक्सागोनल क्रिस्टल जाली में फिक्स होते हैं, जिसके ज़रिए हाइड्रोजन, जिसे सफेद रंग में दिखाया गया है, "सुपरआयनिक" अवस्था में आज़ादी से फैलता है। क्रेडिट: ग्रेग स्टीवर्ट/SLAC नेशनल एक्सेलेरेटर लेबोरेटरी
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रिपोर्टर: उपदेश अवस्थी, स्रोत: द अल्केमी ऑफ एक्सट्रीम्स: सिंथेसिस ऑफ गोल्ड हाइड्राइड।

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