मास्टर साहब e-attendance की वजह से नहीं, x-attendance की वजह से ठगी के शिकार हुए हैं

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 20 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश में एक न्यूज़ सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इसमें बताया जा रहा है कि हमारे शिक्षक मोबाइल एप्लीकेशन के कारण वह ठगी का शिकार हो गए। इस मामले में जब हमने टेक्निकल एक्सपर्ट से पूछा तो उनका कहना था कि फोन कॉल की टाइमिंग एक इत्तेफाक है, एक्चुअल में मास्टर साहब का मोबाइल फोन हैक हुआ है और उनका डाटा बेच दिया गया है। वह e-attendance की वजह से नहीं, x-attendance की वजह से ठगी के शिकार हुए हैं। 

x-attendance का क्या मतलब होता है

भारत में लोग कितने भी परेशान हों लेकिन उनके पास निजी आनंद और मनोरंजन के लिए पर्याप्त समय होता है। आजकल सबके पास में स्मार्टफोन है, स्मार्टफोन में इंटरनेट है। लोगों को अपने डिपार्टमेंट की मोबाइल एप्लीकेशन का संचालन आता हो या नहीं आता हो लेकिन इस इंटरनेट का इस्तेमाल करके व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाना आता है। इंटरनेट का इस्तेमाल करके वह अपने निजी पलों का आनंद लेने का भी प्रयास करते हैं। टेक्निकल एक्सपर्ट गौतम किशोर बताते हैं कि, इस आनंद के लालच में उनके सोचने समझने की क्षमता काफी कम हो जाती है और वह कई बार किसी ऐसी लिंक पर क्लिक कर लेते हैं जिसके कारण कोई छोटा सा सॉफ्टवेयर उनके मोबाइल फोन में इंस्टॉल हो जाता है और उनके मोबाइल फोन की पूरी इनफार्मेशन कॉपी करके हैकर्स को दे देता है। 

अब हैकर्स को पता होता है कि, कौन व्यक्ति अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल किस काम के लिए कर रहा था। हैकर्स इस जानकारी के आधार पर साइबर क्रिमिनल्स को डाटा बेच देते है। साइबर अपराधी व्यक्ति की रुचि के आधार पर ठगी का प्लान बनाते हैं। जिस व्यक्ति की रुचि X सब्जेक्ट में होती है उसको X के आधार पर ब्लैकमेल किया जाता है। क्योंकि अपराधी ने उत्तर खरीदा है इसलिए वेरिफिकेशन के लिए वह बातचीत के शुरुआत में कुछ सवाल करता है और कंफर्म करता है। 

इस बात की पूरी संभावना है कि मास्टर साहब के साथ भी ऐसा ही हुआ हो। अन्यथा क्या कारण है कि स्कूल में खड़े हुए मास्टर साहब ब्लैकमेलिंग का शिकार हो गए। उन्होंने स्कूल में किसी को नहीं बताया और ₹8000 ट्रांसफर कर दिए। मजे की बात देखिए कि अब सबको बता रहे हैं। अपना फोटो भी छपवा रहे हैं, एवं इस सबके लिए हमारे शिक्षक मोबाइल एप्लीकेशन को जिम्मेदार बता रहे हैं। 

बात का बतंगड़ बनाने के कारणविश्वसनीयता और सम्मान कम होता है

इस प्रकार की बात का बतंगड़ बनाने के कारण, शिक्षक समुदाय की विश्वसनीयता और सम्मान भी कम होता है। e-attendance का विरोध बिल्कुल उचित है क्योंकि इसके ऑपरेशन में डिपार्मेंट शिक्षक कर्मचारियों को उसके निजी मोबाइल का उपयोग करने के लिए बाध्य कर रहा है। कानून, लोक शिक्षण संचालनालय को इस प्रकार का आदेश जारी करने की अधिकारिकता नहीं देता। शिक्षकों को केवल इसी ग्राउंड पर लड़ाई लड़ना चाहिए। यदि स्कूल शिक्षा विभाग e-attendance चाहता है तो उसे स्कूल में अपनी डिवाइस इनस्टॉल करनी चाहिए। यदि हेडलाइंस के लिए बेतुके बतंगड़ बनाएंगे, तो शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षकों पर ही भारी पड़ जाएंगे। 

स्पेशल नोट:- मर्यादा का ध्यान रखते हुए हमने इस समाचार में पीड़ित शिक्षक का नाम एवं फोटो इत्यादि प्रकाशित नहीं किया है। समाचार का उद्देश्य केवल इतना है कि, सबको पता होना चाहिए, यदि इंटरनेट नहीं आता तो लिंक पर क्लिक न करें अन्यथा हैकिंग का शिकार हो सकते हैं और आपके मोबाइल फोन से चुराई गई जानकारी के आधार पर आपको ठगी और ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया जा सकता है। दूसरा उद्देश्य यह था कि अपने आंदोलन को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए ऐसा कोई कदम ना उठाएं जिसके कारण पूरा मुद्दा ही खत्म हो जाए।
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!