डोर संग हाथों में है विश्वास, शिखर छूने का है अद्भुत एहसास।
हवा के संग करती है संघर्ष, कभी झुकती ,कभी ऊंची उड़ती है सहर्ष।
जीवन सिखाती है हर एक डोर, संयम से ही मिलता है ठौर।
जब कटती है फिर भी मुस्कुराए, नई राहों की खोज सिखाए।
पतंग कहे मत डरो हार से, उड़ान जन्म लेती है विचार से।
कटकर भी जो हार न माने, मिट्टी में फिर जीवन पहचाने।
जीवन भी पतंग सा प्यारा, संघर्ष से ही निखरे जीवन सारा।
डी एम पाण्डेय
एम एम एम यू टी गोरखपुर
