जबलपुर, 18 जनवरी 2026: हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश के विद्वान न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की सिंगल बेंच ने कर्मचारी की ACR (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन) के मामले में बड़ा ही स्पष्ट और दो टूक का आदेश दिया है। शासन को आदेश दिया गया है कि कर्मचारियों को उसका बकाया भी तन मन और सभी प्रकार के लाभ का भुगतान किया जाए। कर्मचारी के बकाया वित्तीय लाभों पर 6% ब्याज का भुगतान भी किया जाए।
सतना के प्रोफेसर डॉ. अखिलेश मणि त्रिपाठी का मामला
यह पूरा मामला सतना निवासी डॉ. अखिलेश मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि वे उच्च शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभाग ने उन्हें पूर्व में स्वीकृत चौथा वेतनमान और उससे जुड़े लाभ देने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उनके सेवा काल के कुछ वर्षों की एसीआर (ACR) रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थी। विभाग के इस अड़ियल रवैये के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट के समक्ष याचिका प्रस्तुत करके न्याय की मांग की।
अधिवक्ता आकाश सिंघई की दलील: विभाग की गलती का खामियाजा कर्मचारी क्यों भुगते?
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आकाश सिंघई ने दलील दी कि एसीआर को सुरक्षित रखना और उसे रिकॉर्ड में बनाए रखना संबंधित विभाग का दायित्व है। यदि विभाग से रिकॉर्ड गुम हो गया है या उपलब्ध नहीं है, तो इसमें कर्मचारी की कोई गलती नहीं मानी जा सकती। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि केवल इस आधार पर किसी भी कर्मचारी का वैधानिक लाभ रोकना कानूनन गलत और अन्यायपूर्ण है। सुनवाई के दौरान इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए विभिन्न दिशा-निर्देशों और नजीरों का भी हवाला दिया गया।
डिपार्टमेंट को सभी पेंडिंग पेमेंट और 6% इंट्रेस्ट भी देना पड़ेगा
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों से सहमत होते हुए उच्च शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई और डॉ. त्रिपाठी के पक्ष में आदेश जारी किया। कोर्ट ने विभाग को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को तत्काल चौथा वेतनमान प्रदान किया जाए। साथ ही, उससे जुड़े सभी पिछले लाभ और बकाया राशि का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ किया जाए।
हाई कोर्ट द्वारा टाइम लिमिट सेट
अदालत ने इस प्रक्रिया के लिए समय सीमा भी निर्धारित कर दी है। आदेश में कहा गया है कि विभाग को हाई कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर सभी बकाया राशि और ब्याज का भुगतान सुनिश्चित करना होगा। इस फैसले से उन हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके प्रमोशन या वेतनमान संबंधी लाभ रिकॉर्ड की कमी के कारण अटके हुए हैं।
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