मुंबई, 31 दिसंबर 2025: रिलायंस के मुखिया मुकेश अंबानी ने एआई मेनिफेस्टो ड्राफ्ट जारी करते हुए सभी बिजनेस के कर्मचारियों से अपील की है कि वह 26 जनवरी तक अपने सुझाव दें। इसके बाद रिलायंस के सभी बिजनेस में एआई मेनिफेस्टो लागू हो जाएगा और सभी कंपनियों को एआई-नेटिव डीप-टेक में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
मुकेश अंबानी का लॉजिक
मुकेश अंबानी का कहना है कि, रिलायंस को एआई-नेटिव डीप-टेक कंपनी में बदलने से, जिससे 6 लाख से अधिक कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी में 10 गुना सुधार होगा। रिलायंस का प्लान है कि एआई और एजेंटिक ऑटोमेशन से:-
दोहराए जाने वाले कार्यों को खत्म किया जाए- यानी ऐसे काम जिनको बार-बार किया जाता है, उसे एक बार कर्मचारी करेगा और उसके बाद हर बार AI करेगा। तो कर्मचारी को एक ही काम बार-बार नहीं करना पड़ेगा। ऐसा करने से कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ जाएगी, लेकिन शायद को जूनियर कर्मचारियों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी।
निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज बनाया जाए- कंपनी के डिसीजन प्रोसेस में AI शामिल किया जाएगा। वह क्या डिसीजन लेता है, डिसीजन मेकर्स को क्या सलाह देता है, क्या वह भारत का Diversification, बाजार का मौसम, समाज का माहौल और कर्मचारियों की भावनाओं को समझ पाएगा?
क्वालिटी तथा स्पीड में वृद्धि की जाए- इसमें कोई दो राय नहीं की क्वालिटी स्टैंडर्ड AI के माध्यम से सबसे अच्छे तरीके से मेंटेन किए जा रहे हैं और काम करने की स्पीड में भी वृद्धि हो रही है। लेकिन यहां सवाल भी बनता है कि, 6 लाख कर्मचारी जो काम 8 घंटे में करते हैं, वही काम 4 घंटे में कर लेंगे तो बचे हुए 4 घंटे में क्या करेंगे। कहीं ऐसा तो नहीं की पहला टारगेट पूरा होने के बाद 3 लाख कर्मचारियों को बाहर कर दिया जाएगा। क्योंकि बच्चे हुए 3 लाख कर्मचारी 8 घंटे में उतना कम कर लेंगे जितना 6 लाख कर्मचारी कर रहे हैं?
कंपनी के मेनिफेस्टो में बताया गया है कि इसके केंद्र में चार मुख्य पिलर हैं: रिजल्ट, वर्कफ्लो, प्लेटफॉर्म और गवर्नेंस। इनके जरिए रिलायंस अपने सभी बिजनेस में एआई को गहराई से इंटीग्रेट करेगी, साथ ही सेफ्टी, ट्रस्ट और एकाउंटेबिलिटी को सुनिश्चित करेगी।
अंबानी की कर्मचारियों से अपील
अंबानी ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे 10 से 26 जनवरी तक सुझाव दें, ताकि यह मेनिफेस्टो एक एक्शन गाइड बने और 'नया रिलायंस और नया भारत' की नींव रखे। इससे भारत की जीडीपी ग्रोथ में तेजी आ सकती है और लाखों जॉब्स क्रिएट हो सकते हैं, लेकिन एथिकल एआई यूज सुनिश्चित करना चुनौती होगी।
इसके अलावा, हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस ने पहले ही जियो एआई-क्लाउड जैसी इनिशिएटिव्स शुरू की हैं, जो क्लाउड स्टोरेज और एआई सर्विसेज को अफोर्डेबल बनाती हैं, जो इस मेनिफेस्टो से जुड़ी हैं।
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