इंदौर, 31 दिसंबर 2025: नगर निगम इंदौर के कमिश्नर श्री दिलीप कुमार यादव ने भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के मामले में रात 12:00 बजे तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से एक सब इंजीनियर को सेवा से पृथक कर दिया गया है, अस्सिटेंट इंजीनियर एवं जोनल अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई भागीरथपुरा के आठ लोगों की मौत के बाद हुई है।
किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई
इंदौर नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि, आयुक्त श्री दिलीप कुमार यादव द्वारा भागीरथपुरा क्षेत्र अंतर्गत दूषित पानी से स्थानीय रह वासियों के संक्रमित होने के कारण जोनल अधिकारी जोन क्रमांक 4 शालिग्राम शितोले एवं प्रभारी सहायक यंत्री PHE योगेश जोशी को निलंबित किया गया है व प्रभारी उपयंत्री PHE शुभम श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक किया गया है।
इंदौर भागीरथपुरा कांड: लेटेस्ट अपडेट
रिवीजन: भागीरथपुरा में शौचालय की पाइपलाइन लीक हो गई थी। शौचालय का पानी नर्मदा पाइप लाइन में चला गया। इसके कारण अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है।
बीमार लोग: 1000 से अधिक लोग प्रभावित, जिनमें से 100-150 गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती। स्वास्थ्य विभाग ने 12,000 से ज्यादा लोगों का सर्वे किया, जिसमें 1000+ को हल्के लक्षण मिले।
क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि, हमारी पहली प्राथमिकता लोगों को साफ पानी और उपचार उपलब्ध कराना है। यह जघन्य अपराध है। पूरे मामले की जांच होगी और दोषी अफसर को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे कोई भी क्यों न हो।
यह नए तरीके का भ्रष्टाचार है
क्षेत्र में नई पानी की लाइन के लिए चार महीने पहले ही टेंडर जारी हो चुके थे। अगस्त में हुए इस टेंडर में चार एजेंसियों ने हिस्सा लिया था। 2.40 करोड़ में नई लाइन डालना थीं। टेंडर में गंदे पानी की शिकायतों का जिक्र विशेष तौर पर किया गया था। जिम्मेदारों ने अब तक टेंडर ही नहीं खोला।
जिम्मेदार कौन है: सबसे पहले जिम्मेदार तो महापौर ही है। पब्लिक की शिकायतों का निवारण करना। जनता की आवाज पर ध्यान देना और नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को कसकर रखना महापौर (पुष्यमित्र भार्गव) का ही काम है। श्री भार्गव काफी एक्टिव रहते हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से यह भी बताते हैं कि वह बहुत जिम्मेदार है।
जिम्मेदार नंबर दो: नगर निगम कमिश्नर श्री दिलीप यादव IAS है। टेंडर की प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाए। पाइपलाइन का काम समय पर शुरू हो जाए। यह सब कुछ नगर निगम के कमिश्नर की जिम्मेदारी है। यदि अगस्त में जारी हुआ टेंडर दिसंबर तक ओपन नहीं किया गया तो इसके लिए नगर निगम के कमिश्नर ही जिम्मेदार है।
इसके अलावा कोई जिम्मेदार नहीं है क्योंकि बाकी किसी के पास इतनी स्वतंत्रता ही नहीं है। उसको केवल आदेश का पालन करना होता है।

.webp)