नई दिल्ली, 31 मार्च 2025: सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट का एक बड़ा फैसला सामने आया है। एक दिव्यांग महिला कर्मचारी को disability certificate के आधार पर कई बेनिफिट्स मिले, प्रमोशन और बड़े पद का प्रभार भी मिला, लेकिन फिर अचानक उनका प्रमोशन रिजेक्ट कर दिया गया। महिला कर्मचारियों ने लाभ प्राप्त करने के लिए दूसरा disability certificate प्रस्तुत किया तो डिपार्टमेंट ने उन्हें रिटायर कर दिया। हाई कोर्ट का कहना है कि डिपार्टमेंट में जो भी किया सही किया।
दिव्यांग सर्टिफिकेट के कारण पदोन्नति नहीं हुई
मामले की शुरुआत 1990 से होती है, जब याचिकाकर्ता महिला ने पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट में अपनी सेवा शुरू की। उन्होंने लगातार promotions हासिल करते हुए 2023 तक district town planner के पद पर काम किया। इसी दौरान वे senior town planner की पोस्ट के लिए eligible हो गईं। लेकिन department ने उनके नाम पर आगे विचार नहीं किया। वजह? सेवा के दौरान उन्होंने hearing disability का certificate जमा किया था, जिसमें temporary hearing impairment 41% बताया गया। यह certificate उन्होंने दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाले benefits के लिए submit किया, जिसमें retirement age 58 की बजाय 60 साल तक extend करने का provision भी शामिल है।
प्रमोशन मांगा तो डिपार्टमेंट में रिटायर कर दिया
फिर, उन्होंने एक और certificate जमा किया, जिसमें impairment 53% और permanent disability बताई गई। department को दो अलग-अलग certificates मिलने से doubt हुआ। medical board ने उनकी disability को temporary मानते हुए claim reject कर दिया। नतीजतन, उन्हें 58 साल की उम्र में retire कर दिया गया। महिला ने कोर्ट में याचिका दाखिल की, प्रमोशन और extra benefits की मांग की।
जस्टिस नमित कुमार की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि respondents की ओर से याचिकाकर्ता को senior town planner पर promote न करने में कोई गलती नहीं है। लेकिन interesting point यह है कि सेवा के दौरान उन्हें senior town planner का extra charge सौंपा गया था। इसलिए कोर्ट ने उनकी उस demand को accept कर लिया, जिसमें extra charge handle करने के लिए allowances और payments की मांग थी। इसका मतलब हुआ कि अब महिला कर्मचारी को केवल एक्स्ट्रा चार्ज के लिए अलाउंस पर विचार किया जाएगा। प्रमोशन और रिटायरमेंट के मुद्दे पर कोई सुनवाई नहीं होगी।
प्रमोशन, कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं है: हाई कोर्ट
इस मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रमोशन न तो कोई vested right है और न ही fundamental right, लेकिन प्रमोशन के लिए नाम पर विचार किया जाना एक fundamental right जरूर है। यह केस उन सरकारी कर्मचारियों के लिए विचारणीय है जो सेवा के दौरान disability certificate के आधार पर benefits claim करते हैं, लेकिन inconsistencies की वजह से challenges face करते हैं।
यह फैसला कर्मचारियों की भावनाओं को respect करते हुए balance बनाता है, जहां genuine claims protect होते हैं लेकिन fraud या inconsistencies पर strictness बरती जाती है।
इस विषय से संबंधित अन्य जानकारी
यदि हम इससे संबंधित अन्य जानकारी देखें, तो हाल ही में अगस्त 2025 में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने एक और ruling दी, जिसमें कहा गया कि सेवा के दौरान disability acquire करने वाले employees को physically handicapped quota के तहत promotion का हक है। यह benefit केवल initial appointment पर PH candidates तक limited नहीं है। उदाहरण के लिए, एक केस में court ने retrospective promotions का order दिया, ताकि administrative delays से disability quota defeat न हो। ऐसे rulings से दिव्यांग कर्मचारियों के rights मजबूत होते हैं, लेकिन certificates की authenticity पर focus बढ़ता है।
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