Digvijay Singh कांग्रेस के आडवाणी हो गए: राज्यसभा की दावेदारी छोड़ी फिर भी, पार्टी पीछे पड़ी है

Updesh Awasthee
भोपाल, 31 दिसंबर 2025:
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के दावेदार, राज्यसभा के सदस्य और राजनीति के चाणक्य, आजकल बड़े तनाव में है। उनकी हालत बिलकुल वैसी ही हो गई है जैसी जिन्ना के मजार से लौटे आडवाणी की हो गई थी। दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा सीट की दावेदारी छोड़ दी है फिर भी उनकी अपनी पार्टी के लोग उनके पीछे पड़े हुए हैं। उनको पार्टी से निष्कासित करवाने के लिए मुहिम चल रही है। 

दिग्विजय सिंह को कांग्रेस से निष्कासित करवाने की मुहिम

कांग्रेस की राजनीति बड़ी गजब की चीज होती है। यहां विरोधी टीम से तो सावधान रहना ही पड़ता है, लेकिन यह भी देखना पड़ता है कि कहीं अपना पार्टनर बल्लेबाज अपन को रन आउट ना करवा दे। मध्य प्रदेश में कल तक जो लोग राजा साहब का कर दिग्विजय सिंह के चरणों में अपना सर झुकाया करते थे, आज उनके खिलाफ खड़े हैं। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने से लेकर 26 दिसंबर 2025 तक, कांग्रेस पार्टी के जितने भी लोग दिग्विजय सिंह से परेशान हुए, झूठे वादे या दिग्विजय सिंह द्वारा किए गए पक्षपात के शिकार हुए, वह सब लामबंद हो गए हैं। इनमें पार्टी के लिए काम करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता, कमलनाथ को नेता मानने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता और जीतू पटवारी को अपना नेता मानने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल है। दिग्विजय सिंह को कांग्रेस से निष्कासित करने के लिए ज्ञापन दिए जा रहे हैं। 

दिग्विजय सिंह के समर्थकों की दो स्थिति

दिग्विजय सिंह के समर्थकों को दो स्थिति में देखा जा सकता है। कुछ लोग अपने काम धंधे में लगे हुए और ऐसी तनावपूर्ण स्थिति में भी दिग्विजय सिंह के साथ नहीं है। शायद वह चाहते हैं कि जिस प्रकार दिग्विजय सिंह ने उनका काम करने के लिए उनसे चक्कर लगवाए थे। अब जबकि दिग्विजय सिंह को उनकी जरूरत है तो, दिग्विजय सिंह उन्हें फोन लगाएं। इसके अलावा कुछ ऐसे समर्थक भी है जो दिग्विजय सिंह को कांग्रेस पार्टी का सच्चा गांधीवादी नेता मानते हैं। ऐसे समर्थकों में से कुछ का मानसिक नियंत्रण गड़बड़ हो गया है। दिग्विजय सिंह के बारे में सवाल पूछने पर भड़क जाते हैं। अभद्रता करने लगते हैं। गालियां देने लगते हैं। 

कुल मिलाकर हालत काफी तनावपूर्ण है। जिस समुदाय और संप्रदाय के लिए दिग्विजय सिंह, ने अपना पूरा पॉलीटिकल करियर दाव पर लगा दिया, वह लोग भी दिग्विजय सिंह के साथ नहीं है। दिग्विजय सिंह बेहद अकेले पड़ गए हैं और उनकी हालत बिलकुल वैसी ही हो गई है जैसी, जिन्ना के मजार से लौटे लाल कृष्ण आडवाणी की भाजपा में हो गई थी। ✒ उपदेश अवस्थी
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