RGPV BHOPAL: 20 करोड़ के रूसा घोटाले की संभावना, जांच कमेटी गठित

Updesh Awasthee
भोपाल, 9 नवंबर 2025
: राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एक बार फिर एक नई घोटाले की संभावना के कारण सुर्खियों में आ गया है। पिछले कुछ सालों से इस यूनिवर्सिटी में इनोवेशन नहीं बल्कि घोटाले हो रहे हैं। ताजा मामला राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत मिले 20 करोड़ का है। संदेह की स्थिति बनी है कि घोटाला हुआ है। जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। 

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत 2020 में 20 करोड़ मिले थे

राजीव गांधी विश्वविद्यालय भोपाल को, RUSA (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत 2020 में 20 करोड़ रुपए की ग्रांट मिली थी। सूत्रों के अनुसार, रूसा की ओर से 10 करोड़ रुपए नए निर्माण और अपग्रेडेशन के लिए और 10 करोड़ रुपए प्रिक्योरमेंट (उपकरण और संसाधन खरीद) के लिए स्वीकृत किए गए थे। ये राशि 13 विभागों के माध्यम से खर्च की जानी थी। अभी तक 12 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारी अभी तक इसके तहत हुए कामों का उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं दे पाए हैं। रूसा की ओर से कई पत्र लिखे जाने के बाद भी जब उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया तो विश्वविद्यालय प्रशासन को संदेह हुआ और एक जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी की शुरुआती जांच में ही गड़बड़ियां सामने आ गई हैं।

इन्वेस्टिगेशन टीम के सदस्यों के नाम

सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अमित विश्वकर्मा, डॉ. अरुणा रावत, पॉलीटेक्निक कॉलेज के डॉ. रंजीत जोशी, डॉ. सतीश जैन, और आरजीपीवी के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. राजेश भार्गव शामिल हैं।

ये सामने आया जांच में

कई जगह काम स्वीकृत ड्राइंग के अनुसार नहीं हुआ। जैसे परिसर में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लोकेशन ड्राइंग में एक जगह थी, लेकिन निर्माण दूसरी जगह कर दिया गया। इससे पार्किंग एरिया खत्म हो गया।
निर्माण कार्यों की फाइलों में विवि इंजीनियर के साइन नहीं हैं। सभी फाइलों पर केवल संपदा अधिकारी(रिटा.) सबूर खान के साइन हैं। इस कारण निर्माण की तकनीकी स्वीकृति और गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
कमेटी ने सभी 13 विभागों से संबंधित टेंडर डॉक्यूमेंट, मेजरमेंट बुक, एस्टीमेट, डिजाइन और ड्राइंग की प्रतियां मांगी हैं। 

दो अधिकारियों के पसीने छूट

ग्रांट का सही उपयोग हो सके, इसके लिए दो समन्वयक नियुक्त किए गए थे। इनमें यूआईटी के सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. एसएस कुशवाह और स्कूल ऑफ एनर्जी एंड एनवायर्नमेंट मैनेजमेंट के प्रोफेसर डॉ. पंकज जैन हैं। दोनों ने टिप्पणी करने से इनकार किया है।

डॉ. मोहन सेन, रजिस्ट्रार, आरजीपीवी ने कहा
रूसा संचालनालय को उपयोगिता प्रमाण-पत्र भेजे जाने हैं। इसके सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे है। इसलिए जांच शुरू कराई गई। बिना सत्यापन के प्रमाण-पत्र नहीं दिए जा सकते। जांच में गड़बड़ी पाई जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  

लगातार हो रहे घोटाले

आरजीपीवी में 2024 में 19.48 करोड़ रुपए का एफडी घोटाला हो चुका है। इसमें पूर्व कुलपति और रजिस्ट्रार की गिरफ्तारी हुई थी। वि​वि में 2008-09 से 2023-24 के बीच हुए निर्माण कार्यों में जो भुगतान हुआ, उसमें 88 करोड़ का हिसाब नहीं मिला था। खेल परिसर व ऑडिटोरियम का निर्माण ड्राइंग के अनुसार नहीं हुआ था।
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