भोपाल, 17 नवम्बर 2025: केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान में भी बिलकुल वैसी फीलिंग दिखाई दे रही है, जैसी उमा भारती में दिखाई देती थी। जब शिवराज सिंह को सीएम बनाया गया था। फर्क केवल इतना है कि श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी भावनाओं को दबा कर रखा हुआ है, लेकिन अपनी जाति समाज के कार्यक्रम में दिल की बात जुबां पर आ ही गई। जाति समाज के लोगों के बीच में शिवराज सिंह ने खुद को सबसे बड़ा धाकड़ बताया दिया।
अपनी जाति के लोगों के बीच में निकली दिल की भावनाएं
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में धाकड़ समाज के दीपावली मिलन कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भरे मंच से अपनी भावनाओं का इजहार कर दिया। श्री शिवराज सिंह चौहान राजनीति के चतुर खिलाड़ी है इसलिए उन्होंने बात को दूसरे तरीके से कहा। शिवराज सिंह बोले कि वह मेरे लिए परीक्षा की घड़ी थी। मेरे मन में भी भावना आ सकती थी, गुस्सा आ सकता था लेकिन मैं खुद को समझाया। माथे पर शिकन तक नहीं दिखाई देनी चाहिए। (इस प्रकार श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बता दिया कि, वर्तमान सरकार उनके परिश्रम और प्रयासों से बनी है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी किसी विशेष रणनीति के कारण उनके स्थान पर डॉक्टर मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना दिया। जबकि मुख्यमंत्री पद के लिए वह (शिवराज सिंह चौहान) एकमात्र नेता थे और सभी योग्यताएं रखते थे)।
मैंने इतनी मेहनत की, लोगों ने किसे वोट दिया?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज ने कहा- '2023 के विधानसभा चुनाव के बाद की परिस्थितियां जीवन की बड़ी परीक्षा थीं। बंपर बहुमत मिला था। सबको लगा था कि अब सब कुछ स्वाभाविक है, लेकिन जब तय हुआ कि मुख्यमंत्री मोहन जी होंगे। मेरे माथे पर बल नहीं पड़ा।'उन्होंने कहा- 'अलग-अलग रिएक्शन हो सकते थे। गुस्सा भी आ सकता था कि मैंने इतनी मेहनत की, लोगों ने किसे वोट दिया? लेकिन दिल ने कहा- शिवराज, ये तेरी परीक्षा की घड़ी है। माथे पर शिकन मत आने देना। आज तू कसौटी पर कसा जा रहा है। और मैंने मोहन जी का नाम प्रस्तावित किया।
राजनीति में शिवराज सिंह और उमा भारती अब असली भाई-बहन
मध्य प्रदेश की राजनीति में जैसे शिवराज सिंह चौहान जगत मामा है वैसे ही उमा भारती सबकी बहन है। लेकिन अब इस मामले में दोनों असली भाई बहन हो गए हैं। जब शिवराज सिंह को अचानक मुख्यमंत्री बनाया गया था तब उमा भारती की फीलिंग भी बिल्कुल ऐसी ही थी। उस समय उमा भारती को लगता था कि उसका उन्होंने बनाई है, वो ना होती तो भाजपा सत्ता में ना होती। सरकार उनकी संतान है, उनकी संपत्ति है। तब शिवराज सिंह चौहान का कहना था कि, सरकार भले ही उमा भारती ने बनाई हो लेकिन उमा भारती को संगठन ने बनाया है इसलिए संगठन का निर्णय ही सही होता है। शिवराज सिंह का यह बयान अब शिवराज सिंह पर फिट बैठता है।
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