जबलपुर, 10 नवंबर 2025: युवा उम्मीदवारों के लिए एक राहत भरी खबर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच और इंदौर खंडपीठ ने आज चार महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2025 में कोविड-19 महामारी के कारण हुए नुकसान को मानते हुए अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की छूट प्रदान की है। इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला है, जो लंबे इंतजार के बाद अब अपनी किस्मत आजमा सकेंगे।
मध्य प्रदेश में सब इंस्पेक्टर पुलिस भर्ती 2017 से नहीं हुई
मामला कुछ इस तरह का है। मध्य प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर की भर्ती आखिरी बार 2017 में हुई थी। उसके बाद, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने 2019-20 के कैलेंडर में इसे शामिल किया, लेकिन विभिन्न कारणों से फॉर्म प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी और इसे कैलेंडर से हटा दिया गया। फिर 2020 में कोविड काल ने सब कुछ थाम लिया, जिसके असर से भर्ती प्रक्रियाएं सालों तक रुकी रहीं। इस परिस्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने 2022 में एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि पिछले तीन वर्षों में रुकी हुई भर्तियों के पहले विज्ञापन में अधिकतम आयु में 3 साल की छूट दी जाएगी। चूंकि यह भर्ती 2025 में जारी हुई, इसलिए उम्मीदवारों ने इसे लागू करने की मांग की।
अभ्यर्थियों ने सरकार का हर दरवाजा खटखटाया, न्याय नहीं मिला
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, पुलिस मुख्यालय और अन्य जगहों पर गुहार लगाई, लेकिन जब कोई सकारात्मक जवाब न मिला और फॉर्म भरने की अंतिम तिथि (10 नवंबर 2025) नजदीक आ गई, तब उन्होंने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं। इन याचिकाओं का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने किया।
जब सभी विभागों में छूट मिली है तो फिर पुलिस विभाग में क्यों नहीं
कोर्ट में पेश तर्कों में चौहान ने स्पष्ट किया कि 2017 के बाद यह पहली सब-इंस्पेक्टर भर्ती है, जो 2019 के कैलेंडर में प्रस्तावित थी लेकिन कोविड के कारण विलंबित हो गई। सरकार के 2022 के वादे के मुताबिक, दिसंबर 2023 तक की रुकी भर्तियों में छूट का प्रावधान था, और लगभग सभी विभागों में इसे लागू किया गया है। फिर पुलिस भर्ती में ऐसा भेदभाव क्यों? इन तथ्यों से सहमत होते हुए कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं को फॉर्म भरने और परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दे दी।
यह फैसला न केवल इन उम्मीदवारों के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि महामारी जैसे संकटों में युवाओं के सपनों को संरक्षित रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी। आधुनिक भारत में ऐसी नीतियां हमें सिखाती हैं कि समय के साथ न्याय व्यवस्था भी युवा ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित हो रही है। उम्मीद है कि यह छूट अन्य प्रभावित अभ्यर्थियों तक भी पहुंचेगी, ताकि मेरिट पर आधारित चयन सुनिश्चित हो।

.webp)