नई दिल्ली, 13 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई दूसरे दिन भी नहीं हो सकी। अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने इसकी जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन मामलों का फैसला होने ही नहीं देना चाहती।
सरकार की ओर से कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया गया
शाह ने बताया कि ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने 13 और 14 नवंबर को इन प्रकरणों की सुनवाई कराने के लिए अदालत में निवेदन किया था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चीफ जस्टिस की कोर्ट में ही इस संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया जाए। इसके बावजूद मध्य प्रदेश शासन ने इन मामलों की सुनवाई कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। शाह ने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट में दोनों दिनों महाधिवक्ता मौजूद रहे, लेकिन सरकार की ओर से कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया गया।
अधिवक्ता ने सरकार के रवैये को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार का चेहरा बिलकुल साफ है कि वह ओबीसी आरक्षण के इन प्रकरणों का निर्णय नहीं कराना चाहती। इससे ओबीसी समुदाय के हित प्रभावित हो रहे हैं। शाह ने आगे बताया कि संबंधित कानून पर कोई स्टे आदेश नहीं है, फिर भी सरकार ने लाखों पदों को होल्ड कर रखा है। साथ ही, समस्त भर्तियों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का विज्ञापन जारी करके ओबीसी वर्ग को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।
यह मामला मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी उम्मीदवारों को भारी नुकसान हो सकता है। ओबीसी संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि अदालत में चीफ जस्टिस के समक्ष आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।

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