जबलपुर, 14 नवंबर 2025: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में 2025 के प्रमोशन नियमों को चुनौती देने वाली याचिका संख्या डब्ल्यूपी 24880/25 की सुनवाई आज दूसरे दिन भी जारी रही। कोर्ट ने अगली सुनवाई 20 और 21 नवंबर 2025 को दोपहर 12 बजे से निर्धारित की है। याचिकाकर्ताओं ने पिछले दो दिनों से अपनी बहस पूरी की है, जबकि अब हस्तक्षेपकर्ताओं को अपनी दलीलें पेश करने का अवसर मिलेगा।
SC-ST के लिए क्रॉस-लेवल प्रमोशन का कोई प्रावधान नहीं
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि इन नियमों में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए क्रॉस-लेवल प्रमोशन का कोई प्रावधान नहीं है, जिसके कारण ये नियम असंवैधानिक हैं। इस याचिका को अजाक्स संघ ने अप्रैल 2025 में दायर किया था, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी कर्मचारियों के प्रमोशन से संबंधित है। उच्च न्यायालय ने शुरू में सुप्रीम कोर्ट में संबंधित केस लंबित होने का हवाला देकर सुनवाई से इंकार कर दिया था, लेकिन अब मामला आगे बढ़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने प्रमोशन नहीं दिए
हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह पक्ष रख रहे हैं। ठाकुर ने कहा कि मध्य प्रदेश के लाखों कर्मचारी 2016 से प्रमोशन की प्रतीक्षा में हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के स्टे आदेश का हवाला देकर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में अंतरिम आदेश जारी कर निर्देश दिया था कि सरकार चाहे तो 'रिजर्व टू रिजर्व', 'अनरिजर्व्ड टू अनरिजर्व्ड' तथा मेरिट के आधार पर प्रमोशन कर सकती है। देश के अधिकांश राज्यों ने इस निर्देश के अनुसार प्रमोशन नियम बनाकर कर्मचारियों को प्रमोशन दिए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश का सहारा लेकर ऐसा नहीं किया।
ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यह स्थगन एसएलपी (सी) 13954/2016 से संबंधित था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2016 को उच्च न्यायालय के याचिका संख्या 1942/2011 के 30 अप्रैल 2016 के आदेश पर स्थगन लगाया था। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि इस कारण प्रमोशन प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जो कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध है। अगली सुनवाई में हस्तक्षेपकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट इस मामले पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।

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