Google पोल खोलेगा: जंगल कितना कटा, फसल का कितना नुक्सान हुआ, सब बताएगा

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नई दिल्ली
। Google ने Geospatial AI क्षमताओं का विस्तार किया है। भारत के संदर्भ और सरल हिंदी में बताएं तो यह पूरे देश के वनविभाग की पोल खोलकर रख देगा। जंगल में कटाई हो रही है या नहीं, नेता, पत्रकार और NGOs अपने लैपटॉप पर देख पाएंगे। सिर्फ इतना ही नहीं, तूफान, बाढ़, भूकंप या किसी भी प्राकृतिक आपदा में फसलों का कितना नुक्सान हुआ है, Google बता देगा। यानी किसान और पटवारी मिलकर मुआवजा घोटाला नहीं कर पाएंगे। इसमें और भी बहुत कुछ है।  

Google का सैटेलाइट क्या क्या देख रहा है

Google की यह पहल traditional mapping से आगे जाती है। AI अब केवल buildings (इमारतों), roads (सड़कों), और water bodies (जलाशयों) को पहचान ही नहीं रहा, बल्कि उनके बीच के जटिल संबंधों को भी समझ रहा है। उदाहरण के लिए, यह किसी छत (rooftop) के आकार और सूर्य के संपर्क (sun exposure) का विश्लेषण करके उसकी solar energy potential (सौर ऊर्जा क्षमता) का अनुमान लगा सकता है। एक अवधारणा जो Project Sunroof में पहले से ही कार्यरत है।

लैपटॉप पर देख सकते हैं जंगल में कटाई हुई या नहीं

कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया, "हमारा लक्ष्य अरबों static pixels को actionable information में बदलना है। Geospatial AI हमें urban expansion, deforestation, और climate change के प्रभावों को अभूतपूर्व सटीकता के साथ ट्रैक करने की शक्ति देती है।"

Impact in Key Application Areas

इस तकनीक का प्रभाव विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देखा जा रहा है:
Environment and Sustainability: AI tree canopy coverage का मानचित्रण करके Urban Heat Islands के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। यह water resource management और वनों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।

Urban Planning: Geospatial AI, शहरों के विस्तृत और यथार्थवादी 3D models बनाती है, जो Immersive View जैसी सुविधाओं का आधार हैं और autonomous vehicles के लिए road infrastructure का सटीक मानचित्रण करती है।

Disaster Response: प्राकृतिक आपदाओं के बाद, AI मॉडल कुछ ही घंटों में before-and-after imagery (पहले और बाद की छवियों) की तुलना करके rapid damage assessment (तेजी से क्षति आकलन) कर सकते हैं, जिससे राहत और बचाव प्रयासों को तेज़ी से निर्देशित किया जा सकता है।

Google का कहना है कि Geospatial AI के माध्यम से, वे न केवल अपने उत्पादों (जैसे Google Maps) को बेहतर बना रहे हैं, बल्कि सरकारों, गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs), और शोधकर्ताओं (researchers) को भी ऐसे उपकरण (tools) प्रदान कर रहे हैं जो उन्हें पृथ्वी की सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान करने में मदद करेंगे।
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