BHOPAL का इतिहास स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए: सांसद की मांग, प्रतिक्रिया और विवाद पढ़िए

Updesh Awasthee
भोपाल, 10 नवंबर 2025
: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के इतिहास को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। भाजपा सांसद आलोक शर्मा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जोरदार बयान दिया, जिसमें उन्होंने मांग की है कि भोपाल का समृद्ध अतीत मध्य प्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (MPBSE) के सिलेबस में हिंदी सब्जेक्ट के तहत शामिल किया जाए। उनका कहना है कि भोपाल सिर्फ मुस्लिम शासकों का शहर नहीं रहा, बल्कि हिंदू राजाओं ने यहां 700 वर्षों तक शासन किया, जो युवा पीढ़ी को सिखाया जाना चाहिए।

भोपाल विलीनीकरण आंदोलन की कहानी भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बने

यह बयान सरदार वल्लभभाई पटेल के 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित 'यूनिटी मार्च' कार्यक्रम की जानकारी साझा करने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में आया। सांसद शर्मा ने सरदार पटेल के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि विलीनीकरण आंदोलन की कहानी भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बने, ताकि छात्र शहर के बहुआयामी इतिहास से परिचित हों। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए उल्लेख किया कि भोपाल सम्राट अशोक, प्रतिहार वंश, चंद्रगुप्त मौर्य, राजा भोज परमार और रानी कामलापति जैसे हिंदू शासकों का गढ़ रहा है। यह दावा करते हुए उन्होंने जोर दिया कि इतिहास की एकतरफा व्याख्या से नई पीढ़ी का दृष्टिकोण संकीर्ण हो सकता है, और आधुनिक शिक्षा में संतुलित नरेटिव जरूरी है।

हालांकि, इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं भी आमंत्रित की हैं। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने इसे विभाजनकारी राजनीति का उदाहरण बताते हुए कहा कि भोपाल- मध्य प्रदेश का है, भारत का है, हर नागरिक का है। उन्होंने भाजपा की मानसिकता को 'एंटी-कॉन्स्टिट्यूशन' और 'एंटी-नेशनल' करार दिया, जो सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा रही है। 

शिक्षाविदों और इतिहासकारों का मानना है कि प्राचीन काल से लेकर नवाबी दौर तक भोपाल का इतिहास वाकई विविधतापूर्ण है। लेकिन सिलेबस में बदलाव की मांग को लेकर बहस जारी है, जहां कुछ इसे सकारात्मक सुधार मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक एजेंडा। सांसद शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल सच्चे इतिहास को सामने लाना है, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना।

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