डर, भय, सदमा (fear, fright, shock) ये तीनों एक दूसरे के समान रूप होते हैं। अगर किसी व्यक्ति के दिमाग में इनका प्रवेश हो जाए तो व्यक्ति समय से पहले या तो पागल हो जाए या मर भी सकता है। क्या किसी व्यक्ति को इस तरह की जानकारी देना जिसके कारण वह fear, fright अथवा shock से मर जाए, कानूनन अपराध है।
फांसी की Punishment होने वाले Prisoners (कैदियों) को पहले ही बता दिया जाता है कि उक्त Date को आपकी फांसी की सजा Execute की जाएगी। क्या इस प्रकार की जानकारी देना, अपराधी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है? डॉक्टर अपने मरीज को उसकी बीमारी की जानकारी दे देता है, तो क्या ऐसा करके वह मरीज को मानसिक रूप से कमजोर और बीमार बना रहा है। क्या इस प्रकार की जानकारी देना अपराध माना जाएगा, जिसके कारण कोई व्यक्ति डर, भय अथवा सदमे की स्थिति में आ जाए, अथवा ऐसा होने की संभावना हो?
Bharatiya Nyaya Sanhita,2023 की धारा 31 की परिभाषा
किसी व्यक्ति को carefully दी गई ऐसी जानकारी जो Future में उसे serious illness से Death तक ले जा सकती है एवं यह जानकारी मिलते ही व्यक्ति को किसी भी प्रकार की अपहानि होती है तब सूचना देने वाला व्यक्ति BNS की धारा 31 के अनुसार अपहानि का जिम्मेदार नहीं होगा।
अर्थात किसी Girl को AIDS जैसी serious illness है और उसके होने वाले Husband को Doctor यह Information देता है कि उस Girl की AIDS जैसी serious illness हैं इसके कारण लड़की की शादी टूट जाए तब Doctor द्वारा दी गई Information अपराध नहीं होगी न ही लड़की Doctor को इसका Responsible मानेगी।
Important Decisions:-
श्रीमान X बनाम Y hospital मामले मे Supreme Court द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया कि अगर Doctor द्वारा किसी Patient के Disease के बारे मे बता दिया जाता है और इससे Patient को कोई क्षति होती है तो Doctor इसका Guilty नहीं होगा। हालांकि Doctor से Expectation की जाती है कि वह, Patient को Disease के बारे में इस प्रकार से जानकारी दे कि, उसे Mental रूप से कोई shock न पहुंचे बल्कि वह Mental रूप से ऐसी किसी Information को प्राप्त करने के लिए तैयार हो जाए।
✍️लेखक: बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार, होशंगाबाद)। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article. डिस्क्लेमर - यह जानकारी केवल शिक्षा और जागरूकता के लिए है। कृपया किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से पहले बार एसोसिएशन द्वारा अधिकृत अधिवक्ता से संपर्क करें।

