BNSS 07 - क्या राज्य सरकार न्यायालय के क्षेत्रों मे परिवर्तन कर सकती है, न्यायालय का क्षेत्राधिकार जानिए

Bhopal Samachar
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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 07 के अंतर्गत प्रादेशिक खंड को परिभाषित किया गया है जिसका तात्पर्य यह है कि किसी भी न्यायालय का क्षेत्राधिकार जो किसी विशिष्ट क्षेत्र या प्रदेश में फैला हुआ है।
इस धारा के तहत, प्रादेशिक खंड को निम्नलिखित रूप से बताया गया है:- 
- किसी भी न्यायालय का क्षेत्राधिकार जो किसी विशिष्ट जिले, शहर, या क्षेत्र में फैला हुआ है।
- किसी भी न्यायालय का क्षेत्राधिकार जो किसी विशिष्ट प्रदेश या राज्य में फैला हुआ है।

उदाहरण:
- एक जिला न्यायालय का क्षेत्राधिकार जो किसी विशिष्ट जिले में फैला हुआ है, वह जिले के भीतर के सभी मामलों की सुनवाई कर सकता है।
- एक उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार जो किसी विशिष्ट राज्य में फैला हुआ है, वह राज्य के भीतर के सभी मामलों की सुनवाई कर सकता है।
इस प्रकार, प्रादेशिक खंड से तात्पर्य है कि किसी भी न्यायालय का क्षेत्राधिकार जो किसी विशिष्ट क्षेत्र या प्रदेश में फैला हुआ है, और वह न्यायालय उस क्षेत्र या प्रदेश में आने वाले मामलों की सुनवाई कर सकता है।

लेकिन उपरोक्त धारा में यह प्रावधान भी है की , राज्य सरकार न्यायालयों के क्षेत्रों में परिवर्तन कर सकती है। जैसे कि:- 
- किसी न्यायालय के क्षेत्राधिकार का विस्तार या संकुचन करना।
- किसी न्यायालय के क्षेत्राधिकार को बदलना या स्थानांतरित करना।
- किसी नए न्यायालय की स्थापना करना और उसके क्षेत्राधिकार को निर्धारित करना।
- किसी न्यायालय को समाप्त करना और उसके क्षेत्राधिकार को अन्य न्यायालय को स्थानांतरित करना।

राज्य सरकार इन परिवर्तनों को करने से पहले निम्न बातों का ध्यान रखना होगा:
- परिवर्तन का कारण और आवश्यकता होनी चाहिए।
- परिवर्तन से न्याय प्रशासन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
- परिवर्तन से न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में कोई भ्रम या अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए।

विशेष नोट:- राज्य सरकार को इन परिवर्तनों को करने से पहले उच्च न्यायालय से परामर्श करना होगा और उच्च न्यायालय की सहमति प्राप्त करनी होगी। लेखक✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद)। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

डिस्क्लेमर - यह जानकारी केवल शिक्षा और जागरूकता के लिए है। कृपया किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से पहले बार एसोसिएशन द्वारा अधिकृत अधिवक्ता से संपर्क करें। 

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